क़त्लेआम ~~~~

(संदर्भ – गोरखपुर के अस्पताल की घटना)दद्दा मेरा लाल मर गयाये कैसा बाजार भर गयातेरे दर पर आई थी मैंसुनी मेरी कोख़ कर गयातुझपे भरोसा करती थी मैंमेरा तो विश्वास उड़ गयाअब किसकी गुहार लगाऊंआँचल में मेरे छेद पड़ गयासरकारें कितनी भी आयेकर्म से पीछे क्यों हट गयातूने पढ़ी है इतनी किताबेफिर क्यों चोरोमें बट गयापापहि शायद मैंने करे थेजो तू ऐसा खेल कर गयातूने कोई कसर न छोड़ीमौत मेरे नाम कर गयाआख़िर तुझको कमी थी कैसीजो तेरा ईमान बिक गयासब तुझको भगवान है कहतेतू तो क़त्लेआम लिख गया——————–//**–शशिकांत शांडिले, नागपुरभ्र.९९७५९९५४५०

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18 Comments

  1. Madhu tiwari 21/08/2017
  2. ANU MAHESHWARI 21/08/2017
  3. Shishir "Madhukar" 22/08/2017
  4. Bindeshwar Prasad sharma 22/08/2017
  5. babucm 22/08/2017
  6. kiran kapur gulati 22/08/2017
  7. डी. के. निवातिया 22/08/2017
  8. Kajalsoni 22/08/2017

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