बहुत बेशर्म है या ज़िद्दी

वो लड़का जो कभी किताबों से मोहब्बत करता थासुना है, आजकल मोहब्बत में किताबें लिख रहा हैंपहले रास्ते की किसी सड़क के किसी मोड़ परया शहर के पुराने बाज़ार की किसी दुकान के काँच की दीवारों में कैदकिसी किताब को दिल दे बैठता था ||आजकल वो अपना दिल हथेली पर रख कर घूमता हैउसी सड़क के मोड़ पर किसी दूकान या शॉपिंग मॉल केएस्केलेटर से उतरती हुई लड़की को दिल देना चाहता है ||किताबो के कवर की तरह ही वो चहरे पढ़ना चाहता हैऔर शायद वही गलती जानबूझकर दोहराना चाहता हैजो कि किताबों के कवर देखकर किताब उठाकर उसके अंदर कीकहानियो में फस कर करता था |अब सड़क किनारें किताबों की दुकानों के प्रति उसका मोहभंग हो चूका हैउसकी सोच का स्तर अब गिर चुका है या फिर किताबो का,जब से उसने सड़क के फुटपाथ पर किताबो को बिकते हुए देखा हैजहाँ से वो कभी जूते खरीदा करता था ||वो आज भी पढ़ना चाहता है, मगर केवल चहरे …पर शायद उसने ये हुनर सीखा नहीं है, वो पागल अभी भीहर सीने में दिल ढ़ूढ़ने निकल पड़ता है ||हर बार उसे पत्थर मिले है सीने में , पर पागलठोकरों से सम्हलता कहाँ है ?लगता है बहुत बेशर्म है या ज़िद्दी।|

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12 Comments

  1. babucm 21/08/2017
    • shivdutt 21/08/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 21/08/2017
    • shivdutt 21/08/2017
  3. डी. के. निवातिया 21/08/2017
    • shivdutt 21/08/2017
  4. Madhu tiwari 21/08/2017
  5. Kajalsoni 22/08/2017

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