नज़्म – तुम ही बोलो ….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

आज फिर तुमने, दिल मेरे पे, दस्तक दी है….मेरे बालों में, तेरी उँगलियों ने, हरकत की है…एक सिहरन सी, बदन मेरे में, लहराई है……ठहरे पानी में हलचल ने ली अंगड़ाई हैहै हवाओं का रुख भी, मेरी साँसों की तरह….तेरे अहसास से धीमा सा, कभी तेज ज़रा…झूल रहे पते लटके हुए, हवा से कुछ ऐसे…वक़्त जाने का तेरा, सांस मेरी भटके जैसे….लोग कहते हैं हम तुम से, जुदा रहते हैं…एक दूसरे से अलग और ही, जहां रहते हैं…आज तुम आयी हो, इन सब को,बता कर जाना…प्यार मोहताज नहीं, बंधन का, बता कर जाना…किस तरह इनसे कहूँ मैं, तुमसे रोज़ मिलता हूँ…कब से हूँ तेरा किस जन्म से मैं यूं मिलता हूँ….तुम ही बोलो क्या तुम थी जुदा, मुझसे कभी….मेरी साँसों में नहीं और कहीं, बसी थी कभी…..\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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22 Comments

    • babucm 22/08/2017
  1. डी. के. निवातिया 19/08/2017
    • babucm 22/08/2017
  2. madhu tiwari 19/08/2017
    • babucm 22/08/2017
  3. Shishir "Madhukar" 19/08/2017
    • babucm 22/08/2017
  4. Meena Bhardwaj 20/08/2017
    • babucm 22/08/2017
  5. kiran kapur gulati 20/08/2017
    • babucm 22/08/2017
  6. Kajalsoni 20/08/2017
    • babucm 22/08/2017
  7. ALKA 21/08/2017
    • babucm 22/08/2017
    • babucm 22/08/2017
  8. Bindeshwar Prasad sharma 21/08/2017
    • babucm 22/08/2017
  9. ANU MAHESHWARI 21/08/2017
    • babucm 22/08/2017

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