दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा ( बिन्दु )

सत् से संगत कीजिये रहै न मन में क्लेश ऐसी वाणी बोलिये मन को लगै न ठेस। मंदिर मस्जिद सब करै मन में मन का फेरधरम करम का ढेर है लगै न इनका टेर। आता है तो दीजिये लाख टके की ज्ञान भक्ति में भगवान मिलैं जैसे की रसखान। माया के बाजार में झूठै सब के बोलभटक रहैं क्यों साजना जीवन है अनमोल। क्षमा करत हैं साधु जन करैं दुस्ट संहार मानव मन को बांधता तबहिं चलैं संसार।

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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/08/2017
  2. Meena Bhardwaj 18/08/2017
  3. madhu tiwari 18/08/2017
  4. babucm 19/08/2017
  5. डी. के. निवातिया 19/08/2017

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