तिरंगा जान से भी प्यारा मुझको सारे जग में लहराऊंगा – मनुराज वार्ष्णेय

 एक छोटा मुन्ना पापा से अपने जिद करता है हर बारबॉर्डर पर जाने के लिए पापा मैं भी हूँ अब तैयारदुनिया के खेल तमाशे झूठे बस बॉर्डर पर ही जाना हैअब और नही कुछ चाहिए भारत के गुण को गाना हैतिरंगा ही सर्वोत्तम है सारे जग को बतलाऊंगातिरंगा जान से भी प्यारा मुझको सारे जग में लहराऊंगाबातें सुन सुन के मुन्ने की पापा का सर चकरायाबातें उलट पुलट करके मुन्ने को राह से भटकायापर मुन्ना अब किसकी सुनता मन मे उसने ठानी थीसुलग रही जो ज्वाला तन में खुद उससे अनजानी थीभारत को ही फिर से मैं सोने की चिड़िया कहलाऊँगातिरंगा जान से भी प्यारा मुझको सारे जग में लहराऊंगासमय समय की बात निराली कोयले बीच हीरा पड़ा हुआउतरती रजनी के रंग पर देखो सूरज कैसे खड़ा हुआचाल ढाल देखो मुन्ने की जैसे जैसे बड़ा हुआआज शान में देखो उसको सैनिक बनकर खड़ा हुआशपथ लेता है जीवन में वतन पर ही मर जाऊँगातिरंगा जान से भी प्यारा मुझको सारे जग में लहराऊंगासैनिक मुन्ने को जो देखा पापा भी अब झूम गएथे विचार जो उनके अब तक उल्टी दिशा में अब घूम गएअब तो मुन्ने पर भी पापा को भी गर्व होने लगाभीगी आंख जो देखी उनकी मुन्ना भी रोने लगाकाम करूँगा ऐसे पापा का नाम रौशन कर जाऊंगातिरंगा जान से भी प्यारा मुझको सारे जग में लहराऊंगा

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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8 Comments

  1. डी. के. निवातिया 17/08/2017
  2. madhu tiwari 17/08/2017
  3. Kajalsoni 17/08/2017
  4. babucm 18/08/2017

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