सब हुए एक ही रंग..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

II सरसी/हरिपद छंद IIनंदलाल की मुरली बाजी, चढ़ा प्रेम का रंग Iसुधबुध सबकी ऐसी बिसरी,भूल गये सब ढंग IIकोई नाचे कोई गाये, सब हुए एक ही रंग Iमोहपाश कृष्णा के बंधे, जग मोह हुआ भंग II\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)(सरसी/हरिपद छंद २७ मात्रा होती…१६/११ यति….अंत में गुरु लघु(गाल) अनिवार्य….जो समझ आया उसी को लिख रहा हूँ….१६ मात्रा चोपाई छंद होती…११ दोहा…यह समिश्रण है….हरिपद भी कहा जाता है इस छंद को…और भक्तिमय रचनाओं को कहने में इस छंद का प्रमुख स्थान है……..एक प्रयास है मेरा आप की नज़र…)

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12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 17/08/2017
    • babucm 21/08/2017
  2. Meena Bhardwaj 17/08/2017
    • babucm 21/08/2017
  3. डी. के. निवातिया 17/08/2017
    • babucm 21/08/2017
  4. Kajalsoni 17/08/2017
    • babucm 21/08/2017
    • babucm 21/08/2017
  5. madhu tiwari 18/08/2017
    • babucm 21/08/2017

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