हम बेटे घर छोड़ चले

इस दुनिया में हम करने क्या आयेकैसे बताएं किसे बताएंमाँ के गोद से निकल करपिता की ऊँगली थामीजिस राह हम चलेबस चलते रहेगिरते -उठते लड़खड़ाते बढ़ते बस बढ़ते रहेंजीवन जीना आसान नहींवक़्त के थपेड़ो को सहते सहतेउम्मीदों के बोझ तलेहम घर छोड़ बियाबान चलेमाँ बाप का नाम रौशन करनेहम कुलदीपक बिन दीपकजलते रहे बस जलते रहेखेत -खलिहान सब छोड़ चले आम का बागान छोड़ चलेदोस्तों के संग बितायी शामसब छोड़ चलेपिता का स्नेहमाँ का लाड़बहन की राखीप्रियतमे का श्रृंगारबच्चो का बचपनहम छोड़ चलेहम बेटे घर छोड़ चले——अभिषेक राजहंस

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6 Comments

  1. babucm 17/08/2017
  2. Shishir "Madhukar" 17/08/2017
  3. Vikram jajbaati 17/08/2017
  4. डी. के. निवातिया 17/08/2017
  5. Kajalsoni 17/08/2017
  6. madhu tiwari 18/08/2017

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