उन गीतों को तुम सुर तो दे दो …. भूपेन्द्र कुमार दवे

उन गीतों को तुम सुर तो दे दो  जो रुँधे कंठ में मूक पड़े होंउन गीतों को तुम सुर तो दे दो। जो उलझे वीणा तारों मेंगुमसुम गुमसुम सिसक रहे होंजो आँसू के अंदर छिपकरअपनी कुछ पहचान रखे हों इन आँसू के दुखमय गीतों कोकुछ अपनी पलकों में रचने दो।जो रुँधे कंठ में मूक पड़े होंउन गीतों को तुम सुर तो दे दो। ममता की प्यारी गोदी मेंजो जो मेरे अश्क बहे होंचूम चूम गीले गालों कोमाँ के आँसू उमड़ पड़े हों उस आँचल के कुछ आँसू मोतीमेरे इन गीतों को चुनने दो।जो रुँधे कंठ में मूक पड़े होंउन गीतों को तुम सुर तो दे दो। मस्त हवा के झोंके हल्केशबनम छूकर महक रहे होंडाल डाल अंगडाई भरकरतिनके तिनके उड़े चले हों जिन पंखुड़ियों पर ओस जमीं होकाँटों को उनपर कुछ लिखने दो।जो रुँधे कंठ में मूक पड़े होंउन गीतों को तुम सुर तो दे दो। जो सपनों की नमपलकों मेंआँसु बनकर टूट गये होंऔर नयन भी नींद चुराकरअपनी पलकों झिझक रहे हों कंठित उन भावों को चुन चुनकरकुछ कंपित सुर में ही लिखने दो।जो रुँधे कंठ में मूक पड़े होंउन गीतों को तुम सुर तो दे दो। गर्म सुनहरी रेत के ऊपरमिटने के हर चिन्ह बने होंगर्जन करती लहरों के कुछखामोशी के चिन्ह बने हों उस खामोशी की गुँज के भीतरकुछ आवाज हृदय की उठने दो।जो रुँधे कंठ में मूक पड़े होंउन गीतों को तुम सुर तो दे दो।              …. भूपेन्द्र कुमार दवे                 00000

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13 Comments

  1. Madhu tiwari 12/08/2017
    • bhupendradave 12/08/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 12/08/2017
    • bhupendradave 12/08/2017
  3. babucm 12/08/2017
    • bhupendradave 12/08/2017
  4. Shishir "Madhukar" 13/08/2017
    • bhupendradave 13/08/2017
  5. Shishir "Madhukar" 13/08/2017
    • bhupendradave 13/08/2017
    • bhupendradave 13/08/2017
  6. Kajalsoni 13/08/2017

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