नैन पर फिर भी मिल गए – शिशिर मधुकर

छुपाया बहुत खुद को नैन पर फिर भी मिल गए असर ऐसा हुआ दिल पे फूल खुशियों के खिल गएखौफ ने इस कदर घोला है ज़हर फ़िज़ा में शहर की लाख जज़्बात हैं दिल में मगर लब कब के सिल गए ज़लज़ला लाने वालों ने तो कमी कोई भी ना छोड़ी जड़े जिनकी गहरी थीं दरख़्त वो सब भी हिल गए फूल पाने की कोशिशें ना मेरी परवान चढ़ सकीं फूल के पात झर गए और मेरे तो हाथ छिल गए दूर वो क्या हुए मधुकर जीवन के सफर में आज यूँ लगता है मानो छोड़ के सारे महके अनिल गए शिशिर मधुकर

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22 Comments

  1. Madhu tiwari 11/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 11/08/2017
  2. ANU MAHESHWARI 12/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2017
  3. kiran kapur gulati 12/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2017
  4. anjali yadav 12/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2017
  5. Ram Gopal Sankhla 12/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2017
  6. Kajalsoni 12/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2017
  7. Bindeshwar Prasad sharma 12/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2017
  8. babucm 12/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 12/08/2017
  9. Meena Bhardwaj 13/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 13/08/2017
  10. Abhishek Rajhans 13/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 17/08/2017

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