त्रिवेणी – इतिहास..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

(१)तन धुला मन कलुषित रहा…गंगा अपवित्र होने लगी..पंगु होती नैतिकता..(२)त्रिवेणी कहूँ या संगम मन का…रिश्ता था विश्वास,प्यार और त्याग का…आओ ढूंढें लुप्त हुई सरस्वती को !(३)पाखण्ड का बाजार गर्म है…विचारों का संग्राम तेज है..राम राज्य स्थापना हेतु राम बहुत हैं.(४)ज़िन्दगी क्या है ?…भूतकाल के पन्ने, भविष्य आंकलन..वर्तमान इतिहास!\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

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18 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 11/08/2017
    • babucm 16/08/2017
  2. Shishir "Madhukar" 11/08/2017
    • babucm 16/08/2017
  3. Meena Bhardwaj 11/08/2017
    • babucm 16/08/2017
  4. Kajalsoni 11/08/2017
    • babucm 16/08/2017
  5. डी. के. निवातिया 11/08/2017
    • babucm 16/08/2017
  6. kiran kapur gulati 12/08/2017
    • babucm 16/08/2017
    • babucm 16/08/2017
  7. रामगोपाल सांखला 12/08/2017
    • babucm 16/08/2017
  8. Bindeshwar Prasad sharma 12/08/2017
    • babucm 16/08/2017

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