मेरे अपने…….. काजल सोनी

चली थी मंजिल की तरफ…… एक एक कदम बढाते हुए….. अनजान रास्तों में…. लोग मिलते गये ….. अपने बिछड़ते गये …..मिला तजुर्बा बड़ा…. मिले बहोत से गम….. सम्हाला खुद के भरोसे ने…… पहुंच कर मंजिल की ऊंचाई में…. जब पलट कर देखा….. लोग खड़े थे सभी तालियां बजाते हुए…… ओह……. ये क्या भरम था मेरा…… कि कोई साथ नहीं मेरे….. या मंजिल की ऊंचाई पर खड़े देख…… बन गये सभी गैर भी ………. ” मेरे अपने” *** काजल सोनी *****

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18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 11/08/2017
    • Kajalsoni 11/08/2017
    • Kajalsoni 11/08/2017
  2. ANU MAHESHWARI 11/08/2017
    • Kajalsoni 11/08/2017
  3. Meena Bhardwaj 11/08/2017
    • Kajalsoni 11/08/2017
  4. Madhu tiwari 11/08/2017
    • Kajalsoni 11/08/2017
  5. babucm 11/08/2017
    • Kajalsoni 11/08/2017
  6. डी. के. निवातिया 11/08/2017
  7. Kajalsoni 11/08/2017
  8. kiran kapur gulati 11/08/2017
  9. Kajalsoni 12/08/2017
  10. subhash 13/08/2017
  11. Kajalsoni 13/08/2017

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