त्रिवेणी….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

(१)रुको, देखो, चलो…जीवन तुम्हारा है..अपनों को बेसहारा न करो.(२)धर्म, जात, ताज…कोई कीमत नहीं तुम बिन..इंसान हो तुम !(३)बजुर्गों की लाठी…धरोहर हमारी..आस्तित्व हमारा.\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)(‘त्रिवेणी’ का उदय आदरणीय गुलज़ार साहब की कलम से हुआ है २५-३० साल पहले….तीन पंक्तियों में लिखी जाने वाली रचना है…हाइकू नहीं है जो ५-७-५ में लिखी जाती…इसमें पंक्तियाँ ३ ही होती हैं…विधा से बंधी नहीं….२ पंक्तियाँ जो कहती हैं तीसरी पंक्ति जो अंतर्मन में निहित भाव है उसको वो उजागर करती ..ऐसी रचना कही जाती है…कोशिश की है मैंने समझने की…लिखने की….)

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20 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 09/08/2017
    • babucm 10/08/2017
  2. Madhu tiwari 09/08/2017
    • babucm 10/08/2017
  3. Shishir "Madhukar" 09/08/2017
    • babucm 10/08/2017
  4. डी. के. निवातिया 09/08/2017
    • babucm 10/08/2017
  5. Bindeshwar Prasad sharma 09/08/2017
    • babucm 10/08/2017
  6. bhupendradave 09/08/2017
    • babucm 10/08/2017
  7. Kajalsoni 09/08/2017
    • babucm 10/08/2017
    • babucm 10/08/2017
  8. Meena Bhardwaj 10/08/2017
    • babucm 11/08/2017
  9. kiran kapur gulati 11/08/2017
    • babucm 11/08/2017

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