दौरे-शुकूँ फिर से आज दिल जला गया

दौरे-शुकूँ फिर से आज दिल जला गयामेरा पता पूछ कर कहीं और चला गयाआंखों का अश्कों का न दिल का कसूर थाख़त में लिखा था जो वो ही पढ़ा गया खुद्दार शख़्स है वो अपनी जमात का लोगों में न जाने उसे क्या क्या कहा गयातुम देर से आये हो तन्हा हो इसलिएइस दर से हसरतों का मेला चला गया। ..देवेंद्र प्रताप वर्मा”विंनीत”

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8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 05/08/2017
  2. kiran kapur gulati 06/08/2017
  3. ANU MAHESHWARI 06/08/2017
  4. madhu tiwari 06/08/2017
  5. babucm 06/08/2017
  6. davendra87 07/08/2017
  7. Kajalsoni 09/08/2017

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