अभी बांकी है

ऐ मुल्क-ए चीनआँख मत तरेर तूडोकलाम को कर सलामअपनी महत्त्वकांक्षा को दे विरामऐ मुल्क-ए चीनहै किस मगन में तूहै किस जतन में तूतू व्यर्थ कर रहा अभिमानतेरे नस नस से वाकिफ हैसमूचा हिंदुस्तानतू मत समझ हमें पाकिस्तानऐ मुल्क-ए चीनसुन जराइस धरा के सपूतो में जान अभी बांकी हैतेरे ड्रैगन की जो पूँछ उखाड़ देउस शेर की हुंकार अभी बांकी हैऐ मुल्क -ए -चीनअपने नापाक कदमो कोवापस खींच तूमैकमोहन ने खींच दियाउस सीमा में गुजर-बसर कर तूअगर सीमा लांघा तूनेइस देश का हर हनुमान तेरा सीना लांघ जाएगाअंगद के पांव तलेदब -कुचल रह जाएगा ऐ मुल्क-ए चीनसुन जरा1962 की हार का दंश अब भी भारत झेल रहाहर-हर महादेव बोल रहामाँ की कोख अभी सूनी हुई नहींकलाई की राखी अभी बांकी हैतुझे नेस्तनाबूद कर दे जोवो सिन्दूर अभी बांकी हैऐ मुल्क- ए- चीनसुन जरागर अब भी नहीं संभला तूहिंदुस्तान का हर बेटात्रिशूल बन जाएगाकुराने -पाक की कसमअजान की आवाज में तू दफ़न हो जाएगाअपनी चिता की राख तू समेट भी ना पाएगा—————*अभिषेक राजहंस*

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8 Comments

  1. babucm 03/08/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 03/08/2017
  3. Kiran kapur Gulati 04/08/2017
  4. Kiran kapur Gulati 04/08/2017
  5. डी. के. निवातिया 04/08/2017
  6. Kajalsoni 04/08/2017
  7. chandramohan kisku 04/08/2017
  8. madhu tiwari 06/08/2017

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