भटकती हुई जो नई पीढ़ी है..Raquim Ali

भटकती हुई जो नई पीढ़ी हैजिस तरह तेजी से दुनियां आगे बढ़ती जा रही हैजिस तरह तेजी से नई पीढ़ी, बदलती जा रही है।जिस तरहनई पीढ़ी में स्मार्टफोन से चिपके रहने की आदत बन चुकी हैनई पीढी में, पश्चिमी सभ्यता की नक़ल करने की प्रवृत्ति बन चुकी है।जिस तरहपार्कों में, कालेज के गेट्स पर, पिकनिक स्पॉट परनौजवान लड़के-लड़कियां, हाथों में हाथ डाले दिख रहे हैंआँखों का पानी गिर चुका है, बेहयाई की हदें पार करते नज़र आ रहे हैं।जिस तरहपरिवार में ही अब संवादहीनता की स्थिति बन रही हैनौजवान बड़ों के प्रति, लापरवाह व बिंदास हो रहे हैंबूढ़े दादा-दादी के साये, पोते-पोतियों से दूर होते जा रहे हैं।बंधुओं, अब गंभीरता से विचार करने का वक्त आ चुका हैअब नए सिरे से संभलने-संभालने का वक्त आ चुका है।कुदरती तौर पर जहाँ हम हैं आज, उससे बहुत दूर न हो जाएंअकल्पनीय अवस्था में, पहुंचने में ज़्यादा देर न हो,अब ऐक्शन में आ जाएं।भटकती हुई जो नई पीढ़ी है, उसे अब टोकना होगादुनियां की दौड़ में वह खो न जाए अब रोकना होगा।र.अ. bsnl

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9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 31/07/2017
  2. madhu tiwari 31/07/2017
  3. डी. के. निवातिया 31/07/2017
  4. raquimali 31/07/2017
  5. Bindeshwar Prasad sharma 31/07/2017
  6. babucm 01/08/2017
  7. raquimali 01/08/2017
  8. raquimali 03/08/2017

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