फिर सो ना सका – शिशिर मधुकर

मैंने सोचा बहुत मैं भुला दूँ तुम्हें लेकिन ये मुझसे हो ना सका तेरी छवियां ना दिखला दें आंसू मेरे मैं तो जहाँ में रो ना सकाउल्फ़त की राहों में हरदम यहाँ संगदिल ज़माने ने घायल कियामैं तड़पा चाहे जितना मगर कांटे औरों की राहों में बो ना सका लाख तोहमत लगीं दामन पे मेरे और हम आखिर जुदा हो गए वो समझेंगे क्या मुहब्बत मेरी मैं तेरा तसव्वुर तो खो ना सका मुश्किल से मिलता है साथी कोई सयानेपन से भरे इस संसार में मुझको गम है तेरे समर्पण को मैं प्रेम से अपने भिगो ना सकाजब से तोड़ा है दिल अपनों ने मेरे मुझको नफ़रत जहाँ से ऐसी हुईबंद आँखें चाहे जितनी करीं मधुकर तो मगर फिर सो ना सकाशिशिर मधुकर

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14 Comments

    • Shishir "Madhukar" 29/07/2017
  1. Bindeshwar Prasad sharma 29/07/2017
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2017
  2. डी. के. निवातिया 29/07/2017
    • Shishir "Madhukar" 29/07/2017
  3. madhu tiwari 30/07/2017
    • Shishir "Madhukar" 30/07/2017
  4. babucm 31/07/2017
    • Shishir "Madhukar" 31/07/2017
  5. ANU MAHESHWARI 31/07/2017
    • Shishir "Madhukar" 31/07/2017
  6. Meena Bhardwaj 01/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 01/08/2017

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