आस्मां ने अमावस में चाँद छिपाकर रखा है

आस्मां ने अमावस में चाँद छिपाकर रखा हैरात ने भी पसंदीदा जेवर जुदाकर रखा है। जुगनूओं की बारात भी चुपचाप चल रही हैरात ने गहन सन्नाटा जो सजाकर रखा है। रातरानी ने बगिया को महकाकर रखा हैरात ने लेकिन द्वार अपना सटाकर रखा है। जलाकर रखा दीप भी किस आस में जगता रहेउजाले को अंधेरे ने खूब डराकर रखा है। बेशुमार यादों ने भी करवटें बदल बदलकरइंतिजार की कसक को महज जगाकर रखा है। आपके वादे भी गुमसुम हुए से बैठे हैंस्याह रात ने उनको बंदी बनाकर रखा है। इधर रात भर जागती रात ने झुंझलाकरसुगह का तारा बेनूर-सा बुझाकर रखा है।             ….. भूपेन्द्र कुमार दवे            00000

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4 Comments

  1. arun kumar jha arun kumar jha 26/07/2017
  2. C.M. Sharma babucm 27/07/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/07/2017
  4. Madhu tiwari madhu tiwari 31/07/2017

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