प्रेम – डी के निवातिया

प्रेम कविता जिसका प्रदर्शन हो,वो प्रेम नहीं, नयनों से दर्शन हो, वो प्रेम नहीं !!!जो हम-तुम करते है,प्रेम वो नही,जो मन मे विचरते है, प्रेम वो नही !!!कलम के …

सोचा न था – डी के निवातिया

सोचा न था !सोचा न था एक रोज़ इस मोड़ से गुजरना पड़ेगा, जिंदगी को मौत से पल-पल खातिर लड़ना पड़ेगा,चलते-चलते लड़खड़ा जाएंगे पग कठिन राहो में फिर गिरते-गिरते …

डायरी

1 जितनी भी गुजरी बेमिसाल गुजरी तेरी पनाह में हर चीज बड़ी है मुस्कराते हुऐ पलटे मुक्कदर के पन्ने हमने ज़िन्दगी तेरी आँखों से पढी है 2 जिसपे दूजा …

सीख रहा हूँ – डी के निवातिया

सीख रहा हूँ *** कलम लिए झूल रहा हूँ, मैं लिखना भूल रहा हूँ, क्योकि, अब पढ़ना सीख रहा हूँ ! गीत ग़ज़ल कविता दोहे, कभी समझ आये मोहे, …

रूह का लिबास – डी के निवातिया

रूह का लिबास *** साँसों की गर्म हवा बर्फ सी जमने लगे, लबों से हर्फ़ जर्जर पेड़ से हिलने लगे, रूह ! तुम लिबास बदल लेना उस रोज़, जिस …

बेटियाँ सुरक्षित कैसे हों?

बेटियाँ सुरक्षित कैसे हों? विधा: परिचर्चा ये बात बहुत खेद की है भारत जैसे महान देश में जिसने पूरे विश्व को चरित्र का पाठ पढाया,बलात्कार जैसे पाप कृत्य होते …

मनभावण सावण आय गयो

दोहा सावण री झड़ लग रही, घटा चढ़ी घणघोर। भांग धतूरा घुट रिया, चिलमां चढ़गी जोर।१। सावण मनभावण हुयो, खूब सजै दरबार। शिवजी रो महिनो बड़ो, हो री जै …

फ़लसफां

इक नहीं आप ही तनहा ये ग़म उठाते हैं कितने परवाने हैं जो इसमें जले जाते हैं रस्म-ए-उल्फ़त की निभाना नहीं आसां इतना उम्र हम अहद-ए-वफ़ा पर गुज़ारे जाते …

शालिनी छन्द (“राम स्तवन”)

शालिनी छन्द (“राम स्तवन”) हाथों में वे, घोर कोदण्ड धारे। लंका जा के, दैत्य दुर्दांत मारे।। सीता माता, मान के साथ लाये। ऐसे न्यारे, रामचन्द्रा सुहाये।। मर्यादा के, आप …

शार्दूलविक्रीडित छंद “हिन्दी यशोगान”

शार्दूलविक्रीडित छंद “हिन्दी यशोगान” हिन्दी भारत देश के गगन में, राकेश सी राजती। भाषा संस्कृत दिव्य हस्त इस पे, राखे सदा साजती।। सारे प्रांत रखे कई विविधता, देती उन्हे एकता। हिन्दी से पहचान है जगत में, देवें इसे भव्यता।। …

शिखरिणी छंद (“भारत वंदन”)

शिखरिणी छंद (“भारत वंदन”) बड़ा ही प्यारा है, जगत भर में भारत मुझे। सदा शोभा गाऊँ, पर हृदय की प्यास न बुझे।। तुम्हारे गीतों को, मधुर सुर में गा …

स्रग्धरा छंद “शिव स्तुति”

स्रग्धरा छंद “शिव स्तुति” शम्भो कैलाशवासी, सकल दुखित की, पूर्ण आशा करें वे। भूतों के नाथ न्यारे, भव-भय-दुख को, शीघ्र सारा हरें वे।। बाघों की चर्म धारें, कर महँ …

हरिणी छंद “राधेकृष्णा नाम-रस”

हरिणी छंद “राधेकृष्णा नाम-रस” मन नित भजो, राधेकृष्णा, यही बस सार है। इन रस भरे, नामों का तो, महत्त्व अपार है।। चिर युगल ये, जोड़ी न्यारी, त्रिलोक लुभावनी। भगत …

इच्छा ये तुम्हारी है

इच्छा ये तुम्हारी है देखो सब उजड़ते हुए फूल पत्ते पेड़ झड़ते हुए या नए पुष्प खिलते हुए उनपर भौंरे उड़ते हुए इच्छा ये तुम्हारी है ॥ १ ॥ …

यह कैसा लोकतंत्र है!

निर्दोष कई बर्षों से कारागार में है। चेतावनी लेकर अपराधी बाहर है। नेता जो कहते है वही सत्य है। लोगो का दुःख बेरोजगारी, गरीबी असत्य है। क्या यह गरीबतंत्र …

दोहे

प्रेम भाव एवं भावना, बहते जैसे मेघ जो पहचाने हृदय को ,वो जाने सब भेद प्रेम उत्तम विशाल है, कैसे जाने ठोर सिर्फ लालसा की गढरी ,बांधे फिरते ढोर …

हिंदी दिवस २०२०

भावों की अभिव्यक्ति का करती विधान  है आर्य-भूमि की संस्कृति का शाश्वत-प्रमाण है         माला की मणियों-सा जिसने हमें पिरोया             …

तुम बहुत याद आते हो – डी के निवातिया

तुम बहुत याद आते हो, तुम बहुत याद आते हो,क्यों इतना सताते हो जीने देते,न मरने देते हो क्यो इतना रुलाते !! जब से तुम चले गए दुनिया हमसे …

गुरू

कैसे करूं गुणगान तेरा हे गुरू तू है भगवान मेरा तुमने रोपा वो भ्रूण उर में भाग्य फलित उनवान मेरा मैं ऋणी रहूँगा सदा तेरा बीता बचपन उत्तम मेरा …

दिल तो बच्चा है……………..देवेश दीक्षित

दिल तो बच्चा है तभी तो सच्चा है कदम उठाने से कुछ भी पहले ये सबको आगाह करता है क्या अच्छा है क्या बुरा है ये अवगत उससे कराता …