प्रेम – डी के निवातिया

प्रेम कविता जिसका प्रदर्शन हो,वो प्रेम नहीं, नयनों से दर्शन हो, वो प्रेम नहीं !!!जो हम-तुम करते है,प्रेम वो नही,जो मन मे विचरते है, प्रेम वो नही !!!कलम के …

सोचा न था – डी के निवातिया

सोचा न था !सोचा न था एक रोज़ इस मोड़ से गुजरना पड़ेगा, जिंदगी को मौत से पल-पल खातिर लड़ना पड़ेगा,चलते-चलते लड़खड़ा जाएंगे पग कठिन राहो में फिर गिरते-गिरते …

बसंत आने को है – डी के निवातिया

बसंत आने को है *** दीपशिखा के चंचल चरण करने चले है फागुन वरण शीतल ज्वाला  से अपनी सौरभ मधु बरसाने को है सुना है ! बसंत आने को …

इश्क रूहानी – डी के निवातिया

इश्क रूहानी *** शाम सुहानी हो तो कुछ और बात हो, साज रूमानी हो तो कुछ और बात हो, यूँ तो दीवाने हजार मिलते है हुस्न के, इश्क रूहानी …

नूतन पल – डी के निवातिया

नूतन पल नूतन पल, बेला नई, नवल किरण की भोर ! आशा दीपक जल उठे, तन मन हुआ विभोर !! तन मन हुआ विभोर, नयन कँवल विहग जागे ! …

नया साल – डी के निवातिया

नया साल नए साल के जश्न में, बात नहीं वो शेष ! बीमारी से आज तक, जूझ रहा है देश !! जूझ रहा है देश, चिंता बहुत यह भारी …

कैलेंडर बदले तो नए साल हो गए : “गोपी”

कैलेंडर बदले तो नए साल हो गए तारीखें बीतती गई दिन महीने साल हो गए आया इक्कीस, बीस में कैसे हाल हो गए चंद अल्फ़ाज़ में हकीकत बयां की …

।। जीवन का सार ll

जीवन मे क्या खोया क्या पाया, समझ चौथेपन में आता है। उपलब्धियों अनुप्लाधियों का लेखा जोखा, नजरों के सामने आता है ।।1।। उपलधियों के उजले पक्ष से, यदि मानव …

मिटे नफरतों का कोहरा

मिटे नफरतों का कोहरा लगाकर गले आपको कुछ देर तक रोना चाहता हूं अश्कों से अपने आपके दिल को भिगोना चाहता हूं तिनका तिनका सुख बिखरा है यहां वहां …

चल देता हूँ मैं – डी के निवातिया

चल देता हूँ मैं *** कुछ लिखता हूँ, और लिखकर चल देता हूँ मैं, क्रोध में भी मस्ती को भरकर चल देता हूँ मैं ! है पसंद मुझे, सब …

हुनर- डी के निवातिया

हुनर *** छोटी छोटी बातों पर अपनों से गिला क्या, इश्क मुहब्बत में हुई बातों का सिला क्या, झुकने का हुनर जरूरी है यहां जीने के लिए, अड़कर पर्वत …

।। जय पवन कुमार ।।

जय अंजनि कुमार पवन सुत दुःख भंजन है नाम तुम्हारा। दीन दुःखी असहायों को केवल एक तुम्हारा सहारा।। 1 ।। जो जन भजते तुमको राम कृपा होती स्वत: प्राप्त। …