माँ की ममता

विधा:-गीत युगों-युगों से नेह लुटाती तन-मन जीवन सींच रही है, कौन समझ पाया जग में माँ की ममता का अंत कहाँ है? स्वयं विधाता धरती पर जब तेरी कोख-जन्म …

कौने खेतवा मां अनजवा उगहिहो

जब तुम अयिहो तब का खाइहो कौने खेतवा मां अनजवा उगहिहो सब तो बनाए डारेऊ पक्की जमीनिया नाय राखेओ कौनो कच्ची मिनिया अभहीन के तुम फायदा देखेओ जमींवा से …

मोबाइल से नजरें हटाया करोगे।

मोहल्ले में जब तुम आया करोगे किसी नुक्कड़ पर दोपहरी बिताया करोगे नजरों से नजरें जब मिलाया करोगे नए फैशन के दौर भी को आजमाया करोगे चार लडको के …

बोलती मूरत का करिश्मा दिखाएंगे ।

हज़ारो बातें दफना कर आज पर जिन्दगी की चादर पहना कर चलो काटते हैं वो सफ़र तैखने मे रखेंगे तेरी भी ख़बर बोलती मूरत का करिश्मा हम दिखाएंगे दुनियां …

किरीट सवैया

(किरीट सवैया) भीतर मत्सर लोभ भरे पर, बाहर तू तन खूब सजावत। अंतर में मद मोह बसा कर, क्यों फिर स्वांग रचाय दिखावत। दीन दुखी पर भाव दया नहिँ, आरत हो भगवान मनावत। पाप घड़ा उर माँहि भरा रख, पागल अंतरयामि रिझावत।। ×××××× *किरीट सवैया* विधान यह 8 भगण (211) प्रति पद का वर्णिक छंद है। हर सवैया छंद की …

कब समझेगा – डी के निवातिया

कब समझेगा वक़्त बता रहा है तुझको तेरी खामियां, पहचान ले अब तो अपनी नाकामिया, अब नहीं समझा तो क्या तब समझेगा, जब मिट जायेंगी जहां से तेरी निशानियां …

पंहुचा घर का।

दिल्ली से चले हम गांव अपन घर अपने पांव। जब देखेन हम नोएडा चलत गाएन रोड़ा आय रोड़ा अमेठी राहेंय बहुताए मीठी, लाग गाए झोरा मां बहुताये चींटी पेड़ा …

बुढ़ापे का साथ।

बाबा लाए झाबा भरके, हम जागेन भोरे तड़के देखीन जैसे बाबा आए, बाबइन धीरे से मुस्कियाए, लड़वाए भागे आगे पाछे दाढ़ी उनकी लड़कवाए खाचे, बाबइन भीतर से शरबत लइके …

जिंदगी के कैमरे से दूर हूं मैं।

जिंदगी के कमरे से दूर हूं मैं अकेली पर सबसे महफूज हूं मैं न रहेंगी निगाहें मुझ पर किसी की न दुनिया मुझे लगाएगी दुःखी सी। लोग कहते है …