प्रेम – डी के निवातिया

प्रेम कविता जिसका प्रदर्शन हो,वो प्रेम नहीं, नयनों से दर्शन हो, वो प्रेम नहीं !!!जो हम-तुम करते है,प्रेम वो नही,जो मन मे विचरते है, प्रेम वो नही !!!कलम के …

सोचा न था – डी के निवातिया

सोचा न था !सोचा न था एक रोज़ इस मोड़ से गुजरना पड़ेगा, जिंदगी को मौत से पल-पल खातिर लड़ना पड़ेगा,चलते-चलते लड़खड़ा जाएंगे पग कठिन राहो में फिर गिरते-गिरते …

हिंदी दिवस २०२०

भावों की अभिव्यक्ति का करती विधान  है आर्य-भूमि की संस्कृति का शाश्वत-प्रमाण है         माला की मणियों-सा जिसने हमें पिरोया             …

तुम बहुत याद आते हो – डी के निवातिया

तुम बहुत याद आते हो, तुम बहुत याद आते हो,क्यों इतना सताते हो जीने देते,न मरने देते हो क्यो इतना रुलाते !! जब से तुम चले गए दुनिया हमसे …

गुरू

कैसे करूं गुणगान तेरा हे गुरू तू है भगवान मेरा तुमने रोपा वो भ्रूण उर में भाग्य फलित उनवान मेरा मैं ऋणी रहूँगा सदा तेरा बीता बचपन उत्तम मेरा …

दिल तो बच्चा है……………..देवेश दीक्षित

दिल तो बच्चा है तभी तो सच्चा है कदम उठाने से कुछ भी पहले ये सबको आगाह करता है क्या अच्छा है क्या बुरा है ये अवगत उससे कराता …

पिताजी मेरे रहे नहीं……………देवेश दीक्षित

पिताजी की तबीयत खराब हुई स्थिति को देख लगा डर डॉक्टर से बात हुई कहा उसने ले आओ इधर हमने फिर एम्बुलेंस बुलाई पहुंच गए हम उधर भर्ती उन …

असामाजिक तत्व…………………..देवेश दीक्षित

असामाजिक तत्व जब आते हैं समाज में मचाते हैं हुड़दंग डराते हैं बेकार में अपनी धाक जमाने को आतंक ये मचाते हैं गुनाह पर गुनाह कर कानून को अंगूठा …

शिक्षक

शिक्षक जो अपने जीवन के कर्णधार हैं उनको हमारा प्रणाम बारम्बार है   अंदर दे सहारा हैं बाहर करें चोट जो एक-एक कर सब दूर करें खोट वो शिक्षार्थी …

मदारी या फ़रेबी – डी के निवातिया

मदारी या फ़रेबी *** मदारी हर दफ़ा कोई नया खेला रचाता है फँसाकर जाल में अपने हमें बुद्धू बनाता है सुई की छेद में हाथी घुसाता है सुना हूँ …

कोई  गोरी  ऐसी  मिले – डी के निवातिया

(ताटंक छंद आधारि) कोई  गोरी  ऐसी  मिले *** कोई  गोरी  ऐसी  मिले  जो, मेरे  दिल  की  रानी हो चतुर चपल चंचल हो चितवन, सुंदरता की नानी हो, देव लोक …

अगर कीचड़ में खिला हूँ तो क्या है

दो बातें तो करलो, मन को परखलो, मन शुद्ध, तन मैला तो क्या है, कमल हूँ कमल सा दिल है मेरा, अगर कीचड़ में खिला हूँ तो क्या है । आसमां को मैं …

मातृभूमि का श्रृंगार करो – डी के निवातिया

आज़ादी के पावन दिन पर, मातृभूमि का श्रृंगार करो देश ध्वजा का संदेश यहीं, वैर  भाव का संहार करो।। जो मिट गए, जो खो गए, हाथ थाम तिरंगा सो …

हुई महंगी मुबारकबाद -डी के निवातिया

हुई महंगी मुबारकबाद *** हुई महंगी बहुत ही मुबारकबाद, के सोच समझ कर दिया करो, देना हो जरूरी,तो रखना हिसाब, हर घड़ी हर शख्स को न दिया करो..!! कुछ …

नकाब

नहाकर, कपडे बदलकर, गीला तौलिया बालकनी में इक रस्सी पर टांगा । आँखों में नमी लिए, माथे पर शिकन लिए, जल्दी -जल्दी बाल बनाये। इक परफ्यूम की शीशी से, …

आदमी है, खाता है – डी के निवातिया

आदमी है, खाता है, *********** आदमी है, खाता है, खाकर भी गुर्राता है, करता है खूब चोरी साथ में सीना जोरी कर के गर्व से चौड़ी छाती लाल पीली …

रिश्ते – डी के निवातिया

रिश्ते *** *** रिश्ते वही मगर, रिश्तो में रिश्तो की वो बात नहीं है, सम्बन्ध वही, मगर सम्बन्धो में ज़ज्बात नहीं है, घर में बैठे, चार प्राणी अपनी गर्दन …

तू कैसा प्रेमी है – डी के निवातिया

तू कैसा प्रेमी है !! *** देता है न माँगता सोता न जागता न रोता न हँसता भागता न थकता देखता न तकता, बोलता न बकता, सभी को लगता …

कैसा ये सावन आया – डी के निवातिया

  कैसा ये सावन आया, मुझको अबकी ना भाया, बारिश की इन बूंदों ने जी भर मुझको तड़पाया ।। बागों में कोयल बोले, कानो में मिश्री घोले, अमवा की …