तेरा दर्द – अरूण कुमार झा बिट्टू

* अंधेरी राहों में बस एक यही चिराग रहा होंगे सहारे और अनेक पर अपना तो एक राम रहा * क्या खूब था इश्क तेरा ना जिए न जिंदा …

सरगम

न तुम कह रहे थे न मैं गुनगुना रही थी फिर भी ये ऑंखें सरगमे बजा रही थी उड़ रहे थे परिंदे मूर्तियों से टकराके मिलेंगे की न मिलेंगे …

तेरे शहर से मेरा गाँव अच्छा है – डी के निवातिया

कुछ अस्त-व्यस्त, कुछ टूटा-फूटा, घर कच्चा है लेकिन तेरे शहर से, आज भी मेरा गाँव अच्छा है, बहुत कुछ नया चलन में पाया तेरे शहर आकर, कोई किसी का …

छठ पर कविता – अरूण कुमार झा बिट्टू

वो घाट की रौनक। वो बाहर बुला रहा हैं । आ रहा हैं छठ मुझे मेरा बिहार बुला रहा हैं। वो घाटों की खुशबू वो दियो का प्रकाश केले …

अरूण कुमार झा बिट्टू शायरी

* मैं मुकम्मल हूं अपने फैसले लेने में कोई मुझे समझाए नही अपने विचार अपने पास रखे कोई मुझे बताए नही * खुशबू हैं फिजाओं में धड़कन शोर मचाती …

शायरी अरूण कुमार झा बिट्टू

# अपने दोस्त थोड़े कम ही बनते है क्योंकि हम जुबां के सच्चे हैं हजूर मिटना हो तो मिट भी जाते हैं । क्योंकि हम वसूलो के पक्के हैं …

गर – शिशिर मधुकर

टूटेंगे धागे ये नकली बंधन नहीं प्यार के गर पांवों में छाले पड़ेंगे रस्ते मिलें खार के गर यूं ही तो मिलता नहीं है देखो खुदा जिंदगी में एक …

शायरी- अरूण कुमार झा बिट्टू

# शायर हूं मैं साहब शायराना अंदाज हैं। मेरी दौलत कुछ और नहीं बस दिल की आवाज हैं। # तू मेरी चाहत हैं। तू मेरी इबादत हैं। मैं कैसे …

नारी भेद।

नारी भेद चेत रहा था मुझमें क्या फर्क है जो पुरुषार्थ नहीं तुझमें नयनों से न नीर बहावे दया प्रेम त्याग दिखावे क्या जिवन तेरा है मुझमें नारी भेद …

क्या पानी पी कर जी पाएंगी।

न कुछ कहो अब आंखें समुंदर बन जाएंगी डूबना आखिर तुम्हे नही है पानी क्या पी कर जी पाएंगी। तुम बिखरोगे सब कहीं चांदनी रातों क्या सताएंगी खूब करते …