हम ना थकते है – शिशिर मधुकर

राहों में जिन पे तुम मिले उन पे भटकते हैं मुद्दत हुई तुम्हें ढूंढते पर हम ना थकते है अमवां पे बौर आ गया पुरवाई जब चली फल मगर …

उदासी से भरा ये दिल हमारा देखिए

या तो समंदर में , वबंडर का नजारा देखिए या उदासी से भरा , ये दिल हमारा देखिए गर जिंदगी है खुशनुमा , तो कुछ ऐसा करके देखिए दिल …

प्रेम की लौ – डी. के. निवातिया

कोई कली जब फूल बनकर महक उठती है, उसे देख तबियत भंवरे कि चहक उठती है, महकने लगता है अहले चमन खुशबू से, सूने दिल मे भी प्रेम की …

अर्पण….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

तू मेरा मैं तेरी फिर किसे और क्या करूँ मैं अर्पण… भाव तुम से तुम्हीं भाव हो किसका करूँ समर्पण… निर्जीव ‘मैं’ में ‘तुम’ प्राण हो किसका करूँ मैं …

Il स्मृति ll

॥ स्मृति ॥ नाम मेरा है ‘स्मृति’, मेरे जागरण से प्रकट होता है भूतकाल । मेरे ही अस्तित्व से संभव होते, भविष्य की घटनाओं के हाल ॥ 1 ॥ …

गज़ल – ए – चाँद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

गुरु जी, मैं आपका अब मुरीद बन बैठा हूँ चाँद दिखा आज, इसलिए दीद बन बैठा हूँ। आप तो रहनुमा हैं, मेरे इन ख्यालों के चरणों में आपके एक, …

प्रीत के फेरे – शिशिर मधुकर

तुम्हें दिल दे दिया मैंने नहीं कुछ पास अब मेरे मेरी साँसों की खुशबू बस चुकी है साँसों में तेरे दूरियां अब कभी हमको परेशां कर न पाएंगी हवाएं …

कडुवे अहसास की मीठी शा’इरी—(संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली)

(1) इस वक़्त हम से पूछ न ग़म रोज़गार के हम से हर एक घूँट को कड़वा किया न जाए —जाँ निसार अख़्तर (2) मरीज़-ए-ख़्वाब को तो अब शिफ़ा …

आज मैं क्या लिखूँ

शीर्षक — आज मैं क्या लिखूँ कल रात कैसे गुजारी मैंने क्या मैं वो बात लिखूं तुमसे जो हो ना पायी क्या मैं वो मुलाकात लिखूं अपने सारे जज्बात …

शांति की कविता

आसमान में जब गुस्से का आग जल उठेगा जब खेत में उगेगा बोमा,बारूद और बन्दुक हवा में रहेगा विष धर्म दो रूपया भाव से बिकेगा मानवता खून से लतपथ …

प्रेम चाहे पलों का हो- शिशिर मधुकर

वो तो परियों की रानी थी रूप उसका सलोना था किसी भी हाल में लेकिन उसे मेरा ना होना था मुझे मिलती थी वो जब भी सदा कुछ कहना …

प्रेम का रिश्ता – शिशिर मधुकर

मुझको मालूम है तन्हाइयों में तू भी रोता है तेरा ग़म दूर रह कर भी मुझे महसूस होता है ज़िन्दगी क्या करें अच्छे बुरे रिश्तों का बंधन है मुहब्बत …

प्रीत छलक जाती है- शिशिर मधुकर

मैं कितना भी छिपाऊं पर, प्रीत छलक जाती है तन्हाइयों में हर पल बस एक, याद तेरी आती है मैं सोचती हूँ जब भी, ख्यालों में तुम ही आते …