छुप-छुप के – डी के निवातिया

छुप-छुप के *** ये जो छुप-छुप के नज़रे मिलाई जा रही है, जरूर कोई नई साज़िश रचाई जा रही है ! ! ये इश्क का मसला भी सियासत सा …

पवन – डी० के० निवातिया

हे पवन ! तू है बड़ी चंचल री, छेड़ जाती है, अधखिले पुष्पों को…! है जो चिरनिंद्रा में लीन, सुस्ताते हुए डाल पर, तेरे गुजरने के बाद विचलित हो …

काज पांच साल का:-विजय

दे रहा हिसाब तुमको मैं आज पांच साल किया है जो हमने काज कौशल विकास का रथ दौड़ाया हर हुनर को हमने पंख लगाया स्टार्ट-अप स्टैंड-अप हमारा मिशन दे …

आँखों से प्याले – शिशिर मधुकर

मुझे तुम पिला दो न आँखों से प्याले गले से उतरते नहीं अब निवाले बड़ी सूनी सूनी है महफ़िल हमारी तुम ही नहीं जब कैसे उजाले सहा जितना मुमकिन …

प्रकृति की पूजा – शिशिर मधुकर

प्रकृति की पूजा है जो लोग करते निशां उनके देखो हरगिज ना मरते जमीं देखो पेड़ो को साधे हुए है तभी फूल इसके आंचल में झरते समा लेगी सबको …

उड़ जो चुका है – शिशिर मधुकर

ये नदिया का पानी रुकेगा ना अब तो समुन्दर की जानिब ये मुड़ जो चुका है करे लाख कोशिश ज़माना ये जालिम ना टूटेगा रिश्ता जुड़ जो चुका है …

कोशिशें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में थी जब तो प्यार आँखों से झरता था मैंने उल्फत का तब हर पल तेरे संग हंस के बरता था कोशिशें गर तेरी मुझको सुकूं देने …

तन्हा रहने लगे – डी के निवातिया

तन्हा रहने लगे *** पास होकर भी हम तन्हा-तन्हा रहने लगे, जब से एक दूजे को हम बेवफ़ा कहने लगे । इन्हे नादानियों का नाम दे या गलतफहमियां, इनमे …

सभी हैं तुम्हारे सभी हैं हमारे…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

सभी हैं तुम्हारे सभी हैं हमारे मगर फिर भी दुनिया अलग जात होगी… जुबां खोलना मत कुफर तोलना मत निगाहों में अपनी हरिक बात होगी… महब्बत का जब ज़िक्र …

देश

1 कहने से कोई यूँ ही तलबगार नहीं होता शमशीर रखने से कोई पहरेदार नहीं होता फडकती हैं बाजुऐं जुनून सब जोश से बिना पसीना बहाऐ देश से प्यार …

हकीकत – शिशिर मधुकर

बड़ा खूबसूरत है रिश्ता हमारा उल्फत का जज्बा कभी कम ना होगा जहाँ रोशनी फैलती हो रवि से नफरत का हरगिज वहाँ तम ना होगा जो रिश्ते बनाते हैं …