मुहब्बत चीज़ ऐसी है (2)- शिशिर मधुकर

मुहब्बत चीज़ ऐसी है करती मेहरबानियां हरदम ज़िन्दगी रूठ जाती है अगर हों तन्हाईयां हरदम दूर तुम हो गए मुझ से ये सितारों की मर्जी थी फिर भी रहती …

आक्रोश – अनु महेश्वरी

जिसे देखो आक्रोश में है। कोई अपनी हताशा दूसरे पे, निकालने में लगा है, या कोई अपनी धौंस दिखाने में। कोई अपने घरवालों पे, कोई दफ्तर के कर्मचारी पे, …

फिर आना कन्हैया — मधु तिवारी

फिर आना कन्हैया गोकुल नगरी फोड़ देना सांवरिया मेरी गगरी जमुना तट जल भरने जाऊँ जाके वहाँ तेरा दर्शन पाऊँ छवि तेरी भर लूं मैं मन गगरी फिर आना …

तेरा रसमय गीत निमंत्रण ….. भूपेन्द्र कुमार दवे

तेरा रसमय गीत निमंत्रण मेरे प्राणों ने जब पाया प्राण पखेरू बन पीड़ा के यह कोमल गीत चुरा लाया। ‘तुझसे मिलकर भेंट चढ़ाने अर्पित कर दूँ अनुपम माला’ यही …

हे माझी ! मेरे कर्णधार ! ….. भूपेन्द्र कुमार दवे

हे  माझी !  मेरे कर्णधार ! मुझे ना छोड़ बीच मझधार।   जिसको कहते जीवन नैय्या वह मैंने  तुमसे  पायी  है तेरे  ही  कहने  पर  मैंने लहरों  से  होड़ …

तेरी बगिया में मेरा क्या काम …. भूपेन्द्र कुमार दवे

  तेरी बगिया में मेरा क्या काम इसमें है सुन्दर फूलों की शान।   ओस कहे मैं फूलों की हूँ कलियों पर ही मैं इठलाऊँ मेरे  आँसू तप्त  कणों …

खुद ही खुद में खोई मैं हूँ………

खुद ही खुद में खोई मैं रहूँ, क्यों जीवन को आयाम दिया | रक्त सींचकर मिट्टी को, इंसानों का जो नाम दिया || मुझसे तुम उत्पन्न हुए, तब ढ़ोल …

गुजरे लम्हे – शिशिर मधुकर

मेरे नगमों को वो पढ़ते हैं तो घबरा से जाते हैं गुजरे लम्हे कई लफ्जों में पा शरमा से जाते हैं सम्भल के सोचते है जब उमंगे मन में …

आज कब्रस्ताँ मेरा, गुलशन सा जान पड़ता है।

आज कब्रस्ताँ मेरा, गुलशन सा जान पड़ता है। कब्र पर सजदे में मेरी, मेरा कातिल आज आता हे, मैं मुर्दा-गड़ा-पड़ा यहाँ, सब देख आज पाता हुँ, शोर तालियों का …

और मैं हूँ…

*ग़ज़ल* *बह्र- १२२२ १२२२ १२२* (काफिया *ई* और रदीफ़ *है और मैं हूँ*) जहाँ में कुछ कमी है और मैं हूँ, स्याही किश्मत हुई है और मैं हूँ। हृदय …

*नयन नीर की लकीर* *(अतुकांत)* हैं कुछ सूखी आँसुओ की लकीरें, जो बनती हैं भावों के प्रबल दबाव से हृदय से पलकों से हाँ इन्हीं अधखुली पलकों से ढुलक …

मुझपर मेरे गुनाहों का सेहरा रहने दो —– भूपेंद्र कुमार दवे

मुझपर मेरे गुनाहों का सेहरा रहने दो मुझपर मेरे गुनाहों का सेहरा रहने दो मेरे चेहरे पर मेरा ही चेहरा रहने दो जब तक खुद वो अपने गुनाह ना …

कितनी आसानी से मशहूर कर दिया है खुदा ने —– भूपेन्द्र कुमार दवे

कितनी आसानी से मशहूर कर दिया है खुदा ने उतार मुझे सूली से खुद को चढ़ा लिया है खुदा ने। कितनी अनोखी सौगात वो देता रहा है मुझको अपने …

ईश्वर का अस्तित्व – अनु महेश्वरी

मेरे साथ घटने वाली, घटना अच्छी हो या बुरी, भगवान में मेरा विश्वास, कभी न डगमगा पायी। बल्कि मेरा तो विश्वास प्रबल हुआ है और भी। अच्छी घटना को …

मेरे अंतः की आशायें…. भूपेन्द्र कुमार दवे

मेरे अंतः की आशायें हरदम किलकारी भरती हैं। मैं धूल बनूँ या फूल बनूँ बिखराव तपन-सी रहती है सुनसान अंधेरे पथ पर भी कुछ घड़कन दिल की बढ़ती है। …

वक़्त का दौर — डी. के. निवातिया

वक़्त का दौर   लोग पूछते है हाल कैसे है जनाब के अब कैसे बताये किस तरह गुजर रही है जिंदगी ! वक़्त के उस दौर से गुजरा हूँ …

मुझको छोड़ के – अजय कुमार मल्लाह

मैं तलाशती रही इस सवाल का जवाब, कि क्यूं तोड़ गया वो मेरा हर ख़्वाब, हर पल भगवान से मांगा जिसे हाथ जोड़ के, वो चला गया क्यूं अकेला …

करो वंदना स्वीकार प्रभो

करो वंदना स्वीकार प्रभो वासना से मुक्त हो मन,     हो भक्ति का संचार प्रभो जग दलदल के बंधन टूटे हो भक्तिमय संसार प्रभो ॥ वाणासुर को त्रिभुवन …