मिलन – विदाई…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

छत पे कोआ कांव कांव कर रहा है…. कोई और तो अपना है नहीं…शायद… तुम आ रही हो कहीं… मिलोगी मुझसे तो बताऊंगा तुझे… जीना कितना दुश्वार था तेरे …

जगदम्बे भवानी- Bhawana Kumari

है माँ दुर्गे जगदम्बे भवानी तू तो विद्या दायनी है तेरी महिमा अपरंपार तेरे खेल निराले है कभी काली,कभी गौरी बन तो कभी सरस्वती बन कर नित नए रूप …

जी भर के इठलाती हूँ – शिशिर मधुकर

जब जब तुम पर मैं अपने अधिकारों को जतलाती हूँ तुम मेरे हो सब लोगों को इस सच को ही बतलाती हूँ मेरी बचकाना बातों पे जब भी तुम …

मुलाकातें – शिशिर मधुकर

मुलाकातें बड़ी मुद्दत से अपनी हो ना पाई हैं तेरी राहें सदा तकती ये आँखें सो ना पाई हैं बड़ा तूफान आया था और बरखा हुईं जमकर निशां अपनी …

तुमको ख़बर होगी – शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों से खुद को देख लो तुमको ख़बर होगी ये मेरी ज़िंदगी तेरे जलवों के बिन कैसे बसर होगी तेरी अपनी मुसीबत है ये सच स्वीकार है मुझको …

माँ दुर्गा आओ मेरे द्वार – डी के निवातिया

माँ दुर्गा आओ मेरे द्वार *** *** **** ! भक्त की अरदास ये बारम्बार ! आ-माँ-आ, तू, आ मेरे  द्वार !! तुम असुर विनाशिनी तुम कर्मफलदायिनी तुम नवरूप स्वारिणी …

बारिश हुई जब प्रेम की – शिशिर मधुकर

सोचे बिना ये इश्क मैंने तुमसे जो कर लिया अपने वीरान सपनों को तेरे रंग से भर लिया कोई नहीं है ऊँच नीच अब तेरे मेरे दरम्यान तेरी हर …

मुहब्बत में वो ताकत है – शिशिर मधुकर

सुबह उठते ही जो मुझको तुम्हारी दीद मिल जाए मेरे मन के भीतर की हर कली फिर तो खिल जाए तू अपने मरमरी हाथों से मेरी जुल्फों को सहला …

कैप्सूल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

फायदा थोड़ा भी नहीं, न ज्यादा नुकसान करेगा सत्तू आटे की बनी कैप्सूल, न कोई पहचान करेगा। दवा के नाम पर, आज भी लूट अभी तक जारी है लोग …

संकट – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

संकट अगर आज है, तो कल टल जायेगा भरोसा रखिये, हंस कर निकल जायेगा। ज्यादा दिन तक, कोई भी रुक नहीं सकता मेहमान सा, अपने आप वह चल जायेगा। …

जब भी तुम मिले – शिशिर मधुकर

राहों में जब भी तुम मिले यादें पुरानी आ गईं ऐसा लगा अम्बर में ज्यों काली घटाएँ छा गईं ये गुमां मुझ को हुआ कि तुम मेरे नज़दीक थे …

यादें

कैसे बताऊँ मेरी यादें हैं कैसी, खट्टी-मीठी हैं यादें मेरे जैसी.. बचपन के लड़कपन सी, जवानी के अल्हड़पन सी चवन्नी के बेर सी कहानियों के ढेर सी कैसे बताऊँ …

कुण्डलियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कुण्डलियाँ 01 काल रुके ना बात से, ज्ञान बिके ना हाट टले नहीं होनी कभी , मृत पड़े जब घाट। मृत पड़े जब घाट, लगे सब रोने – धोने …

जालिम हुई है ज़िंदगी – शिशिर मधुकर

अधूरी पड़ी है ज़िंदगी ना चैन आता है कोई कहीं ख्वाबों में मुझको बुलाता है साथ जन्मों का तो हरदम टीस देता है तुम भुलाओ ये मगर फिर भी …

गज़ल तुमको क्या समझाऊं – शिशिर मधुकर

ग़ज़ल तुमको क्या समझाऊं मैं तो जज्बात कहता हूँ मुहब्बत जिसने भी दी मुझको उन्हीं के साथ रहता हूँ सोच शब्दों में आती है कलम फिर चलती ही जाती …