सजे सजाये ताज उतर जाते हैं…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरी तरह आप भी मुस्कुराया कीजिये…. दर्दे सागर हरदम न छलकाया कीजिये…. मुफलिसी भगाने का मजबूत इरादा रखो… हर किसी के आगे हाथ न फैलाया कीजिये… गर पाना है …

बिछुरन की रैना…-अरुण त्रिपाठी

*बिछुरन की ये रैना पिया..* (विरह गीत) बिछुरन की ये रैना पिया, कासों हो अब चैना पिया। तुम हौ रूठे निंदिया लूटे, अँसुअन की रसधार न टूटे। साथ न …

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारे मुझको हो तुम सबसे न्यारे चाँद में तो धब्बे बहुत सारे पर तुम हो आंखों के तारे अहो जान अहो प्रीतम प्यारे यू तो …

जमाना….. काजल सोनी

लोग डरते हैं जमाने से….. कि जमाना क्या कहेगा…. और अक्सर फैसले बदल दिया करते हैं….. जो फैसला नहीं बदलते….. वो आशिक कहे जाते हैं या पागल….. पर जमाना …

मुखिया जी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

मुखिया जी तनी कर दीं भलाई अपने अकेले ना खाईं मलाई। नाम होय जाई जब करवा तूं सेवा गरीब ई जनता के मिल जाइ मेवा भटकल बा ओकरा के …

|| कल को हम ना झाँक सके ||

जीवन का चौथापन आते ही, संध्या बेला ने डाला डेरा । बीते समय की स्मृतियों का, मन मानस में कसा घेरा ॥ 1 ॥ अनुभव स्मृतियाँ ही, जीवन की …

शब्द विवेचन- मेरा आईना- प्रेम

शब्द विवेचन – “प्रेम”   शब्द माला के “प” वर्ग के प्रथम और व्यंजन माला के इक्कीस वे अक्षर के साथ स्वर संयोजन के बना “अढाई अक्षर” का शब्द …

शत शत नमन — डी के निवातिया

जय जवान – जय किसान के उद्घोषक भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्य तिथि पर शत शत नमन २ अक्तू १९०४ – ११ जनवरी १९६६ *** …

भारती की आरती उतारिये-अरुण त्रिपाठी

*भारती की आरती उतारिये..* एक कण्ठ से सभी पुकारिये, भारती की आरती उतारिये| भातृ भाव मर्म ही विशेष हो, एकता ही धर्म हो न द्वेष हो| ऊँच-नीच क्लेश को …

कविता :– साधु का जीवन , कवि :– अमन नैन

जिंदगी हमारी साधु की सादा भेष सादा बाना हमारा कर्म हमरा चलते रहना कभी ना एक जगह ठहरना काम हमारा मांग कर खाना प्रभु का गुणगान करते रहना बुरा …

ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

फिसलते फिसलते फिसल गयी जिंदगी मौत से ही पहले उलझ गयी जिंदगी। हम तो यादों में ही बहकर रुक गये मेरे अरमानो को निगल गयी जिंदगी। था सहारा जिसका …

गुनगुनी सी धूप — डी के निवातिया

गुनगुनी सी धूप शरद ऋतू में पीली सुनहरी गुनगुनी सी धूप कुहासे की श्वेत चादर में लिपटे रवि का रूप फुर्रफुराती कलँगी में डाल-डाल फुदकते पंछी अच्छा लगे अलसायी …

आरक्षण की समीक्षा

कुछ काले पन्ने भी छिपे हैं, भारत के इतिहासों में। दम तोङ सिसकती मानवता, भूखी प्यासी सांसो में। इतिहासो के वो कालिख भरे पन्ने खुलने चाहिए। जिन्होने शर्मसार की …

मंदिर वहीं होना होगा

सबके अपने तर्क हैं, सबके अपने राम। हमलावरों ने देश का, किया काम तमाम। नहीं शिकायत राम को, नहीं वनवासी राम। तन मन ह्रदय में बसे, रघुवर आठों याम। …

मंदिर वहीं बनेगा

ये मुद्दा नहीं मंदिर का केवल, ये स्वाभिमान की बाते है। घनघोर गरजती औरंगजेबी शासन वाली रातें हैं। ये चिंगारी है दबी हुई, सदियों से उर में सुलग रही। …

नारी

1) नारी के स्वभाव को  समझने वाला कोई नहीं, तन का पुजारी दुनियाँ सारी,मन का पुजारी कोई नहीं। 2)  नारी को तुम अवला मत कहना यह भुल बहुत ही …

है मुझे भी इंकार प्रिये

शीर्षक-है मुझे भी इंकार प्रिये जब मैं बीच समन्दर मझदार में था जब लहरों में बिन पतवार था जब वक़्त मेरा ,तेरे इंतज़ार में था था तुझे इंकार प्रिये …

आहें सी भरते हैं -शिशिर मधुकर

फूल कितने भी सुन्दर हों मगर शाखों से झरते हैं दर्द से बच नहीं पाते….मुहब्बत जो भी करते हैं कभी वो पास थे अपने तो मन खुशियों में डूबा …