कोई नाराज नहीं चाहिये — डी के निवातिया

कोई नाराज नहीं चाहिये   कितने अमन पसंद लोग है यहाँ किसी को कोई आवाज नही चाहिये। रसूख तो खुदा के फरिश्ते जैसा हो पर रोजा -ऐ- नमाज नही …

आओ न मेरे प्राणाधार…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

चले आओ ना ह्रदय द्वार… मन मेरा करे चीत्कार… कहाँ हो मेरे प्राणाधार…. चले आओ ना ह्रदय द्वार… मूक मन अस्थिर ज्योति…. तड़पें अधर,चाह गंगोत्री…. लुटती सांसें तन जीर्णाकार.. …

प्यार की पुकार

तुम डाले डोरा दिल पर कब्ज़ा किये बैठी हो रातों दिनों न कुछ भिन्न नींदें उड़ाये बैठी हो हम जान है तुम्हारी तुम जान हो हमारी महबूब, जान, प्रिय …

विकाश की जेट यान पर अब भारत मेरी सवार हुई

मिल गया हॉ मिल गया कोई सितारा मिल गया सूरज की तरह चमकने वाला एक तारा मिल गया भर्ष्टाचारियो के बेड़ियो से भारत आज आजाद हुई हॉ विकाश की …

स्नेह सम्मान – शिशिर मधुकर

स्नेह सम्मान जो दिल में हो तो दिख जाता है झूठे चेहरों पे फरेब बड़ा साफ़ नज़र आता है कोई चुपचाप है और तुमसे कुछ नहीं कहता अक्सर मजबूरी …

हवा कहूँ या तेरा नाम लूँ – राकेश आर्यन

खोले अपनी बाँहें.. यूँ चलती रही हवाएं ना शोखियों का होश था ना रवानी का जोश था उसे उड़ने का शौक था न डूबने का ख़ौफ़ था सिर्फ चलना …

जिन्दगी संग जुआ

जिन्दगी संग जुआ जिन्दगी के संग जुआ खेलता हूँ , रोज़ एक नया तजुर्बा झेलता हूँ , नीचता की भी परिसीमा होती है नेकी के नाम बदी करते देखता …

शिकायतें और बस शिकायतें – अनु महेश्वरी

रोज रोज केवल शिकायतें, अब अच्छी नहीं लगती है| आजकल यह भी, मज़बूर करती, सोचनें को, जिन्होनें सायद कभी, कुछ किया न हो, या फिर कर न पाए हो, …

सत्ता कितनी प्यारी — डी के निवातिया

सत्ता कितनी प्यारी मेरे देश के हुक्मरानो को सत्ता कितनी प्यारी है रोज़ मरे मजदूर किसान सैनिको ने जान वारी है आदि से अंत तक का इतिहास उठाकर देख …

बिना पूंजी के व्यापार__अरूण सिन्हा

Retire करने पर मैंने सोचा कि ऐसा कोई व्यापार करूँ जिसमें कोई पूंजी की जरूरत ही न हो और जिसकी मुझे कुछ जानकारी भी हो। दिल लेने और दिल …

जीवन की पहचान

    सबकी मंजिल एक है,मालिक सबका एक धरती-अम्बर एक है साथी ,सूरज चंदा एक। आत्मा अनेक एक परमात्मा, है रूप अनेक माया-मोह बंधन में क्यों, अब बर्बस विवेक। …