गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

भोजपुरी गीत काहे बइठल बाड़ू मनवां के मार ए गोरी लागत नइखे काहे जियरा तोहार ए गोरी। विरह के आग में जलत बाड़ू काहे याद पिया के अब काहे …

क्‍या करें

क्‍या करें यह दिल बेचैन हुआ जाता है क्‍या करें वो अहसास दिल को छुआ जाता है क्‍या करें हमने दिल के जज्‍बात रख दिए अल्‍फाजों में वो इसे …

शिक्षा, शिक्षा नहीं रही।

शिक्षा, शिक्षा रहीं नहीं, व्यापार बना अब डाला है। मंदिर कहलाता था विद्यालय, अब वहाँ स्वार्थ ने बागडोर संभाला है। व्यवहारिक शिक्षा का पतन हुआ, संस्कार जीवन में कैसे …

बोझ….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

मन, काल कोठरी में बंद… दीवारों से टकराता है… गहरे डूब जाता है… कभी… ठक ठक सुनायी देती है… धीमें से दबे पाँव… चलता हो जैसे कोई… या डूबने …

आस्तिन का सांप – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

आग मत लगाओ, अब दाग मिटाओ कुण्डली मार बैठा, नाग भगाओ। आस्तिन का सांप, फन काढ़े बैठा उस दुश्मन का पुराना राग हटाओ। घर से लेकर बाहर तक पहचानो …

मेरा मुल्क किस तरफ जा रहा है..Raquim Ali

आते-आते अब मेरे देश में एक ऐसा अज़ीब ज़माना आया है; बलात्कारी-हत्यारे को समर्थन देकर वकीलों ने प्रदर्शन करके हीरो बनाया है। अब तो बलात्कार और हत्या का भी …

मुझसे मेरी जिन्दगी खफा हो गई

मुझसे मेरी जिन्दगी खफा हो गई मौत को गले लगाकर फना हो गई। मैं नमपलकों से उसे देखता रहा सुलगती जिन्दगी कब धुँआ हो गई। चिड़िया जब हथेली पे …

क्षणिक

जवाब सीधा है सरल है पीछे कई कठिन सवाल है क्षणिक जो भी है एक लंबा संघर्ष है अंतराल है मुस्कुराहटें जो प्रतिमान हैं दिव्यता की पहचान हैं अंतस …

ख्याल बदलिए – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ये दुनिया धन के लिये रोती बहुत है पाने के ख्याल में सोचती बहुत है। किस किस को क्या क्या समझाये अब हम ले जाना नहीं पर बटोरती बहुत …

दिल की आरमां – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

प्यार ऐसा किये कि बदल ही गये मेरे दिल के आरमां मचल ही गये। था भरोसा नहीं फिर भरोसा किया प्यार मंजिल को पाने निकल ही गये। जिगर में …

बेवकूफ़ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

चंदन की लकड़ी समझ, मैं बबूल घीसता रहा मूर्खता थी मेरी, जो उसूल पीसता रहा चापलूसी, ठग बजारी से, कहाँ तक बचियेगा जिसे वाटर प्रूफ समझा, वह भी रीसता …

नादानियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

याद आने लगे हैं वो यादों के पल कुछ ख्यालों में आ गया बीता जो कल। अब तो तन्हा भी रहना गवारा हुआ इश्क मुहब्बत का कैसा देखो ये …

कहाँ है हमारा संविधान

शीर्षक–कहाँ है हमारा संविधान देखिये भाईयो और बहनों हम सब भारतवासी ही है सबसे बड़ा लोकतंत्र है हमारा क़ानून की किताब भी है भैया अरे वही जिसे हम संविधान …

तुम्हारे बाद भी

शीर्षक — तुम्हारे बाद भी तुम्हारे जाने के बाद भी कुछ नहीं बदलेगा यहाँ फिर कोई इंसान के खाल ओढ़े दरिंदा नोच खायेगा किसी बच्ची के जिस्म को अखबार …

मुहब्बत और पूजा – शिशिर मधुकर

तूने सौंपा मुझे सब कुछ अहम दिल से मिटाया है मेरे हर क़तरे क़तरे में नाम तेरा समाया है मुहब्बत और पूजा में फर्क कोई नहीँ होता इन्हीं के …

आग (पियुष राज ‘पारस’)

मेरी नयी कविता कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर ,आपको कैसा लगा जरूर बताएं ,आपकी प्रतिक्रिया के आशा करता हूं 🙏🏻🙏🏻 आग ज्ञान का कोई मोल नहीं यहाँ सुर समाया है …