ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगतें हैं)

जब अपने चेहरे से नकाब हम हटाने लगतें हैं अपने चेहरे को देखकर डर जाने लगते हैं वह हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं जब हकीकत हम …

मैं बदली हूँ, बस नीर भरी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मैं बदली हूँ, बस नीर भरी… बिन बरसे, बरसूं हर घडी… मैं बदली हूँ बस नीर भरी… सावन आये लाये बौछार.. शोलों सा वो करें प्रहार… मन मेरा करे …

खटास – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

पद पैसा और प्रतिष्ठा मिल भी जाय अगर रिश्ते में खटास है तो सब बेकार मतलब जीरो शुरू होती है और सिमट भी जाती है यही आदि है तो …

तस्वीर

शीर्षक–तस्वीर समय के चादर से निकाली वो तस्वीरो का अलबम वो बचपन का किस्सा वो ज़िन्दगी का हिस्सा यादो का बगीचा कुछ धुंधला सा तस्वीर में कभी आँखों का …

मशगूल — डी के निवातिया

 मशगूल *** हंसगुल्लों  में मशगूल है जिंदगानी मतलब की बातो के लिये वक़्त किसके पास ! जब अपने ही नकार देते है अपनों को टुटा हुआ नर्वस दिल फिर …

मुकम्मल -बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

निहायत ही ख्वाब देखते रह गये ख्यालों में कम्बख्त दिल क्यों उलझ गया मुलाकातों में। हम यूं ही प्यार को मुकम्मल करना चाहते थे क्या पता बिन्दु ही गुम …

मैने एक ख्वाब देखा था…

मैने एक ख्वाब देखा था, पंख निकलते ही जहाँ नापने का ख्वाब; बेङियों से छूटते ही गलियों में थिरकने का ख्वाब; अंबर नज़र आते ही ज़मीन पर न टिकने …

मधुर वाणी – 2- बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

बेटा जब,बुलंदियों को छू लेता है तो बाप गर्व से कहता है देखो,यह मेरा बेटा है। बेटी जब कूल की इज्जत रखती हुई अपना घर संहाल लेती है तो …

दो बहनो का मिलन – वार्ता – (हिंदी-अंग्रेजी)

दो बहनो का मिलन – वार्ता – (हिंदी अंग्रेजी)   ! दरवाजे पर ..दस्तक होती है …. डिंग-डोंग …डिंग-डोंग .. डिंग-डोंग …डिंग-डोंग .. हू इस आउट साइड ऑन द …

शायद….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

सपनों से निकल हकीकत तुम बन जाओ…. चाँदनी बन मुझमें तुम कभी सिमट जाओ… रात रौशन हो जायेगी मेरी तुमसे ए सनम… आँचल से मुझपे तारों को छिटका जाओ… …

शिकन तन्हाइयां – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ज़िन्दगी में जब किसी के साथ होती है दवा हर ग़म की उस इंसा के अपने हाथ होती है जिन्हें मिलती नहीं ये नेमतें दुनिया में चाहत की …

पता चल जाता है – शिशिर मधुकर

पता चल जाता है अपना कोई जब याद करता है किसी की छवियां सीने में जो भी आबाद करता है नज़र के सामने आ जाए वो प्यारा हमकदम जल्दी …

मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँ दबी हुई पहचान नहीं हूँ मै स्वाभिमान से जीती हूँ रखती अंदर ख़ुद्दारी हूँ मै आधुनिक नारी हूँ पुरुष प्रधान जगत में मैंने अपना …

हिन्द की हिंदी

शीर्षक-हिन्द की हिंदी उपेक्षाओ के भंवर में दम तोडती हुई सिसकियाँ लेती हुई अपना वजूद बचाने की जद्दोजद में कभी अंग्रेजो की अंग्रेजी ने दम तोड़ा कभी अपनों ने …

अद्भुत रंग बिरंगे धागे

ये अद्भुत रंग बिरंगे धागे खींचें मुझे और लेकर भागें है हर रंग निराला इनका कामनाओं से भी हैं भरपूर है सतरगीं दुनिया ये सारी कभी उभारे कभी कर …