Category: अज्ञात कवि

दोहे – (प्रयाग राज) – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

नागा साधू मस्त हैं, अपने – अपने ढंग। ऐसे बिगुल बजा रहे, सब हो जाते दंग।। मेला कुंभ प्रयाग में, लगी गंग के तीर। गंगा यमुना शारदा, संगम बहे …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सूरदास ने रच दिया , अनुपम यह इतिहास । रूप सलोना लिख गये, जैसे प्रभु हों पास।। जड़ चेतन चैतन्य से, परख लिये अनुराग। ऐसा वर्णन कर गये, दिये …

गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गीत कोई तो गाया होता किस्मत को आजमाया होता। हुनर कोई आपसे सीखे सबों का दिल बहलाया होता। सीखकर लोग नाम कमा रहे महफिल वो अपना जमा रहे। आप …

गणतंत्र – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हम नहीं अब चुप रहने वाले चाहे जितना भी आप कर लो । गणतंत्र सिखाता है सभी को मन ऐसे दिल प्रेम रस भर लो।। शत-शत नमन है वीर …

नेता जी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जिधर देखिये उधर, नेताओं का गरम बाजार है इधर गठबंधन, उधर एन डी ए की सरकार है। जुमले बाजी देश में, चल रही अब जोर – शोर से देखना, …

दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

दोहावली इतना तो करना भला , जो तुम से हो जाय। ऐसी गलती मत करो, लोग सभी घबराय।। संगी साथी जो मिले, करना मन की बात। नाता रिश्ता प्रेम …

दिल की बात

(1) वो  जो  ख्वाब मिला, आंखों को  मेरी, अब  नही मरता कभी जो दिल को थी,उससे शिकायत,अब नहीं करता कहो  जाकर  उसे, जो  छोड़  कर, मुझको  चला  गया बसी  …

मस्त बदन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मस्त बदन में रवानी आई याद फिर से पुरानी आई। गदरा या है तेरा यौवन जन्नत से ये जवानी आई।। फूलों सा लगता है चेहरा उस पर लग जाता …

जिद छोड़ो – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

ऐसे में कब – तक, सिसकते रहोगे जिद छोड़ो वरना, फिसलते रहोगे। क़वायद में तेरा, कमी आ गया है आवेग में अब वो, नमी आ गया है गुफ्तगूँ में …

चाँद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

नज़र की बात को , जुबां पे, कभी लाओ जरा चाँदनी रात हो , फिजाँ को , महकाओ जरा। छुपे हो, बादलों में क्यों तुम, हमें छोडकर दिल दे …

डर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

डर सा लगता बोलूँ कैसे राज मन की खोलूँ कैसे। प्यार करता ये है मालूम दिल उनका टटोलूँ कैसे। बीच में आते शत्रु सारे प्यार गली में डोलूँ कैसे। …

हो दिल की दुआओं में

कभी आँखों के खालीपन, कभी दिल की दुआओं में यकीनन  दूर  हो  मुझसे, या हो  दिल  की  पनाहों में भले  रूठे  हो  तुम  हमसे, मगर  ऐहसास  बाकी   है इन्ही  …

जंजाल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

फिकर सबका, जंजाल लेकर बैठा है हर संस्था, एक दलाल लेकर बेठा है। आदमी की कीमत, आज अब कहाँ रहा गरीब, माथे पर, मलाल लेकर बैठा है।    

इंसान का चेहरा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

शैतान भी रहते हैं, इंसान का चेहरा में हैवान भी सज जाते, दूल्हे का सेहरा में। यहाँ गड़बड़ झाला है, करतूत भी काला है कपटी भी घूम रहे, दाढ़ी …

दुनियाँ की दस्तूर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मुश्किल में आज फिर हम, ऐसे ही घिर गये हैं नज़रों में आपके हम, फिर ऐसे ही गिर गये हैं। हालात बदल गये या फिर, थे मजबूर इतने इंसानियत …

मुझको दिखा ओ रहगुजर, तेरे अन्दर हरा क्या है

मुझको दिखा ओ रहगुजर, तेरे अन्दर हरा क्या है तू  मुश्किलों में  भी खड़ा, तेरे अन्दर  भरा क्या है तुमसे बिछड़ के भी अभी तक, जो हम प्यार करते …

धरणी नववर्ष

क्रुर संस्कृति, निकृष्ट परंपरा का यह अपकर्ष हमें अंगीकार नहीं, धुंध भरे इस राहों में यह नववर्ष कभी स्वीकार नहीं । अभी ठंड है सर्वत्र कुहासा , अलसाई अंगड़ाई …

नूतन वर्ष – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हंसकर करो विदाई भैया नये का करो सगाई कोई नही रुशवाई भैया इनको करो अगुवाई। नूतन हो या साल पुराना सबसे गले मिलाई मत करना तूं दोषारोपन सबकी लाज …

साल अंग्रेजी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हमें तो कर विदाई भैया, मेरी अवधि अब पूरी दे दिया जितना देना था , कुछ भी नहीं अधूरी। अब आया साल नया है, कर उसकी तैयारी किस्मत चाहे …