Category: अज्ञात कवि

रचनाएँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

बिजली चमकती जैसे आसमान का आईना बन गया लफ्ज़ इंसान का। हर चेहरे से परेशाँ है क्यों आदमी कोई मिलता नहीं अब पहचान का। ऐसा कोई नहीं पढ़ सके …

रचनाएँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

विद्या – दोहा जो मांगो मिलता सदा, भोले से वरदान निर्बल को भी देखिए , है तेरा संतान। दानव को वर में दिया, जो मांगा मुँह खोल हम मानव …

आनंद विहार ( दिल्ली ) से गया और गया से भागलपुर दो लात मारके ट्रेन का रोमांचकारी सफर !!

जन्म लेने के पश्चात से ही एक आम व्यक्ति से अधिक यात्रा शायद जीवन रेखा में अंकित है तभी तो अनायास ही न चाहते हुये अनचाहे यात्राओं में अपनी …

सैनिक वीर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चिथड़े – चिथड़े उड़ गये, खून की बह गयी नदियाँ फूट  पड़ा  ज्वालामुखी , दहल  गयी  सब  सदियाँ। कैसा  षडयंत्र  है  तेरा  , वार पीठ पर करने का डर …

शहादत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गद्दारों को फांसी दे दो, भीतर  घात  जो  करते हैं अपने वतन के  खाते हैं , गले दुश्मन  के लगते हैं। सबसे पहले घर को देखो, युद्ध फिर तुम …

बलिदान – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चूड़ी रोयी – रोया कंगना, बिंदी माथ की गिर गयी अंगना सुहागन की सिंदूर लुटा है, चित विह्वल से करती क्रंदना। सूनी हाथों की मेहदी है , बिखर गये …

व्यर्थ ना जाने देगे कुर्बानी-Bhawana kumari

आज कोई शब्द नहीं,कोई भाव नहीं, ना चल रही क़लम मेरी आज, नि:शब्द हो मेरी कलम आज, बस इतना ही लिख रही हर बार लेखनी आज, ना भूल पाऐगे …

चलो प्यार करें

तुमसे  चेहरे  का आईना लिये उल्फत  अपनी  गुलजार  करें इक  दूजे   से  खुल  जायें  तो दिल  बातों  का   बाजार  करें जो  दबी  हुई  दिल  के भीतर होठों  से   अब  …

बसन्त पञ्चमी

माँ तेरी वीणा के स्वर से जीवन का संगीत मिला माँ  तेरे  शब्दों के बल से मुझको मेरा गीत मिला तुलसी  मीरा  सूर  कबीरा  तुझसे ही जाने जाते माँ …

जुआरी दांव पर खुद को लगाने आज बैठा है…

हार कर घर बार सारा सुख, पाने आज बैठा है, जुआरी दांव पर खुद को लगाने आज बैठा है। नहीं बाकी रही कीमत तेरी, तेरी ही नज़रों में, जो …

दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

रखते सदैव साथ हैं , दिल अपने हनुमान । सीना चीर दिखा गये , राम नाम के शान।। भालू – बंदर साथ थे , जामवंत के संग । राक्षस …

दोहावली – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सत्य शिवा सुंदर कहो, मन गहो महादेव। चंदन- वंदन नित करो, तभी भजो गुरुदेव।। भस्म रमाये फिर रहे , ऐसे भोले नाथ। स्वामी हैं त्रिलोक के, सबके ऊपर हाथ।। …

गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चंदन वन के जैसे महके चिड़ियों सा हम चह – चह चहके। वन ये उपवन चमन वतन में हम सोने के जैसे दहके।। ढ़ूढ रहे सूरज की लाली कहाँ …