Category: अज्ञात कवि

महबूब – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हकीकत है या, कोई ख्वाब दिवाने का अदा उनकी है यह, या अंदाज़ लुभाने का। इतनी शोखी, मुहब्बत की महबूब हो तुम नजरें हों इनायत , मेहरबाँ शरमाने का। …

प्रीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जीत कर हार गये मेरी मजबूरी थी प्यार पाने के लिये ये भी जरूरी थी। जिद के खातिर मैंने उनकी लाज रखी क्योंकि मेरे नजरों में प्रीत अधूरी थी।

दुल्हिन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

बारात आई दुल्हिन भागी हंगामा हो गया बाप रे बा। मच गई अफरा तफरी देखो ड्रामा हो गया बाप रे बा। कोहराम मच गया ऐसे घर में भीड़ जमा …

फिरंगी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कहाँ कहाँ तुम बच पाओगे चारो तरफ फिरंगी है। समझ पाओगे उसको कैसे जो मन के सतरंगी है। गिरगिट सा वो रंग बदलता आदत उसकी गंदी है। लालच है …

प्राकृत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

काल के कपाल पर भी लिखा है काल है चक्र सा जो धूम रहा वह जो विकराल है। कौन यहाँ जानता वक्त को पहचानता हर नर – नारी ये …

जरूरत

आजाद समय के आसमान पर जब। जरूरत के कुछ बादल छाने लगे। हम दुश्मनों में देखो उन्हें आज। प्यारे से दोस्त नजर आने लगे। बाहों की कमानें कुछ खुलने …

किस्मत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

अब किस्मत की खेल नहीं होता दबंगों का घर है जेल नहीं होता। टारगेट पर चलते हैं जान लेते हैं उनका ये प्लान फेल नहीं होता। घूसखोर प्रशासन साथ …

दुकान – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

इंसान को ठगने के लिए दुकान आ गये उनकी दवा इनकी दुआ काम आ गये। नब्ज टटोल कर दवा देना भूल गये बैद व्यापार के लिए मर्ज के जाँच …

महा पंडित – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

अपने मन के रावण मारो, इतना तो जरूरी है दहन करते तुम रावण को, क्या तेरा मजबूरी है। खूब जश्न मनाते हो तुम, खूब दिखावा करते हो रावण के …

आँसू – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जान बूझ कर फंसा है तड़पने दीजिये प्यार किया है थोड़ा सा भटकने दीजिये। घाव जिंदा है नासूर बन जाने दीजिये कुछ समझा कुछ समझ जाने दीजिये। इसके होस …

मृदुल वाणी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

उनके मुख मृदुल वाणी से रस अमृत सुधा बरसता है उनके प्रखर मुख मंडल से ऐसे ये भाल चमकता है। ज्ञान पराग की तुमड़ी से केसर का चूर्ण छलकता …

पाहन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

पाहन में विश्वास है इतना, जागृत होकर देखो धर्म संस्कृति ऐसे चलती, जागृत होकर देखो। इस देश का माटी चंदन, जहाँ अमृत गंगा जल है जगह जगह पर देव …

अमर गाथा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जिसने गीता कुरआन लिखा है रामायण का गुणगान लिखा है। बाइबिल – गुरुग्रंथ इतना प्यारा कृष्ण लीला रसखान लिखा है। डूबे तुलसी बाल्मीकि डूबे भक्त हरि का सम्मान लिखा …

मंजर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

लुत्फ़ – ए-रवानी का अब सिलसिला देखिये इस बाग – ए – चमन में फूल इक खिला देखिये। है कितनी दिलकश, नहकतों वाली मंजर अब्रे बहार, इनकी शिकवा न …

माँ — मधु तिवारी

💐माँ 💐 …. मधु तिवारी माँ तेरी ममता का, मोल नहीं है। इससे ज्यादा कुछ,अनमोल नहीं है। कोख से जनम दिया,अमृत पिलाया है एक-एक निवाला, तूने खिलाया है तेरे …

जगदम्बे भवानी- Bhawana Kumari

है माँ दुर्गे जगदम्बे भवानी तू तो विद्या दायनी है तेरी महिमा अपरंपार तेरे खेल निराले है कभी काली,कभी गौरी बन तो कभी सरस्वती बन कर नित नए रूप …

कैप्सूल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

फायदा थोड़ा भी नहीं, न ज्यादा नुकसान करेगा सत्तू आटे की बनी कैप्सूल, न कोई पहचान करेगा। दवा के नाम पर, आज भी लूट अभी तक जारी है लोग …

संकट – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

संकट अगर आज है, तो कल टल जायेगा भरोसा रखिये, हंस कर निकल जायेगा। ज्यादा दिन तक, कोई भी रुक नहीं सकता मेहमान सा, अपने आप वह चल जायेगा। …

कुण्डलियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कुण्डलियाँ 01 काल रुके ना बात से, ज्ञान बिके ना हाट टले नहीं होनी कभी , मृत पड़े जब घाट। मृत पड़े जब घाट, लगे सब रोने – धोने …