Category: अज्ञात कवि

कैसे बनेगी कोई बात – अनु महेश्वरी

कैसे सुधरेंगे हालात, कैसे बनेगी कोई बात, कथनी और करनी में, जब तक रहेगा विरोधाभास| कैसे कायम रहेगा विश्वास, कैसे बढ़ेगा सच का मान, चलता रहेगा झूठ धरल्ले से, …

खटास – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

पद पैसा और प्रतिष्ठा मिल भी जाय अगर रिश्ते में खटास है तो सब बेकार मतलब जीरो शुरू होती है और सिमट भी जाती है यही आदि है तो …

मुकम्मल -बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

निहायत ही ख्वाब देखते रह गये ख्यालों में कम्बख्त दिल क्यों उलझ गया मुलाकातों में। हम यूं ही प्यार को मुकम्मल करना चाहते थे क्या पता बिन्दु ही गुम …

मैने एक ख्वाब देखा था…

मैने एक ख्वाब देखा था, पंख निकलते ही जहाँ नापने का ख्वाब; बेङियों से छूटते ही गलियों में थिरकने का ख्वाब; अंबर नज़र आते ही ज़मीन पर न टिकने …

दर्द बयाँ कर दे अपना रोता तोह हर इंसान है खुद से आगे बढ़ने की ख्वाहिश रखना भी एक इम्तिहान है गिरती इन बूंदों पे तोह नहीं टिका तेरा …

मधुर वाणी – 2- बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

बेटा जब,बुलंदियों को छू लेता है तो बाप गर्व से कहता है देखो,यह मेरा बेटा है। बेटी जब कूल की इज्जत रखती हुई अपना घर संहाल लेती है तो …

आराम चाहिए – मनुराज वार्ष्णेय

नबाबों का साथ , लोगों का सलाम चाहिए चैन की नींद , दिन भर का आराम चाहिए थक गया हूँ दुनिया की भागदौड़ से मुफ्त में मिले ऐसा कोई …

तूने दिल तोड़ा क्यूँ ऐसे – अजय कुमार मल्लाह

कुछ पा नहीं पाया कुछ खो नहीं सकता, तुने दिल तोड़ा है ऐसे कि मैं रो नहीं सकता, यकीं होता नहीं दिल को कहे ये हो नहीं सकता, तुने …

हिन्दी हैं हम – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हिन्दी हैं हम, हिन्दुस्तान हमारा सब देशों में, खानदान हमारा। हम संस्कृति हैं, संस्कृत हमारा भाषा ही यह, पहचान हमारा। कितने सबल और कितने प्रवल कितने निर्मल यह गुणगान …

आशा तुम्हारी याद ने – अजय कुमार मल्लाह

नींद आँखों से उड़ाकर जगाया है बहुत, चैन दिल से मेरे चुराकर सताया है बहुत, सुनो आशा तुम्हारी याद ने रुलाया है बहुत। अपने नासमझ दिल को समझाया है …

कविता क्या है ? (मुक्ता शर्मा)

कविता क्या है? विचारों की रेल भावनाओं के डिब्बे और शब्दों का सार्थक खेल लौकिक से आलौकिक तक सच्चाई की जमीन  हो तो क्या कमाल है कविता इस अनुसंधान …

विश्वास हमारा बना रहे – अनु महेश्वरी

ऐसी दया हम पे करो हे भगवन, तुझ पे, विश्वास हमारा, बना रहे कोई चमत्कार ऐसा करो, हे भगवन, तुझ पे, अटूट आस्था, कायम रहे| सुना है तुमने, कंस …

मधुर वाणी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

वाणी को नियंत्रित कीजिए आचरण अपने आप सुधर जायेगा प्रेम से तो पत्थर भी पिघल जाता है नियत साफ रखिये किस्मत बदल जायेगा।

कौआ और गिद्ध (मुक्ता शर्मा)

                कौआ और गिद्ध निर्जीव का माँस नोचने वाले दुर्गंध में जीने वाले                                  एक जैसे,पर दिखने में अलग.                     देखो गिद्ध और कौआ …

मरहम – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

मरहम दर्द निवारक दवा राहत देनेवाली एक औषध। बातों का अपने तजुर्बे अपने अंदाजो का अपने ख्यालों का एक मरहम। एक दर्द के लिए एक तंग दिल के लिए …

समाज की सूरत – अनु महेश्वरी

जब तक बदलेगी नहीं, मानसिकता हमारी, केवल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे से, कैसे बनेगी समाज की सूरत ही प्यारी? मुस्कुराके करो स्वागत, बेटी का, जनम से, बिखरेगी …

धार में मिला किनारा

डूबा हूँ आँसुओं में, ले दर्द का सहारा ये कम क्या मुझ पर अहसान यह तुम्हारा वे और लोग होंगे व्यथित, लहरों के संग भटके मुझको तो धार में …

वाह रे दुनिया – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

वाह रे दुनिया वाह रे देश ऐश कर लो बदल कर वेश। कहने का कलियुग है आया ममता मोह से भरी है माया इतना बड़ा जंजाल को देखो अपने …

सवेरा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कब से सोये हो कब तक सोयेगा अरे, अब तो जागो सवेरा तेरा इंतज़ार कर रहा। नींद में कब तक रहोगे खोये खोये कब तक ढहोगे क्या कर्म तुझे …