Category: अज्ञात कवि

‘… वीरों को’

सुनों हिंद देश के वासी, नमन करो शहीदों को जिन्होंनें देश आज़ाद कराया, याद करो उन वीरों को अंग्रेजों को मार भगाया जग में जिनका शौर्य छाया रण भूमि …

कामयाबी का सूत्र – मनुराज वार्ष्णेय

ईश्वर की आराधना में बहुत शक्ति होती है माँ बाप की सेवा ही सच्ची भक्ति होती है दुनिया के बन्धनों में फँसकर कुछ नही मिलता भवपार आकर के ही …

वटवृक्ष………!—-ऋतुराज

आज याद आती है- पिताजी की वो बातें थकान और तनावग्रस्त आकर लंबी सांसे ले बिस्तर पर ऐसे बैठना जैसे- किसी परिंदे को मिला हो अपना बिछड़ा परिवार सुकून …

साइकिल

सूचना : मेरी रचना “जननी जन्म से वंचित क्यों ?” प्रतियोगिता में है, कृपया पढ़ें और अपने बहुमूल्य मत दें. पेज का लिंक- http://sahityapedia.com/?p=70944 Share this (इमेज पढने में …

रचना प्रतियोगिता में शामिल है, एक बार अवश्य पढ़ें और उपयुक्त लगने पर अपने मत दें.

“जननी जन्म से वंचित क्यों ?” शीर्षक के अंतर्गत रचित यह रचना प्रतियोगिता में शामिल है अत आप और आप के सभी परिचितों से नम्र निवेदन है की इस …

आहिस्ता

तेरी ख़ातिर आहिस्ता, शायद क़ामिल हो जाऊँगा। या शायद बिखरा-बिखरा, सब में शामिल हो जाऊँगा॥ शमा पिघलती जाती है, जब वो यादों में आती है। शायद सम्मुख आएगी, जब …

मंगलमय पुकार करूँ

यदि जीवित रहूँ माते, तेरा ही श्रृंगार करूँ अर्पण करूँ सर्वस्व तूझे, हर त्याग से सत्कार करूँ; हो त्याग ऐसा वीरों सी, कलुषित विविध विकार हरूँ पुष्पित – पल्लवित …

कुछ बाते जानी है मैंने – अनु महेश्वरी

अगर खुश रहना है सोचो मत ज़्यादा बेवजह सोचेने वाले दुखी रहते ज़्यादा न करो कोशिश कभी खुश करने की सबको दे पाया यहाँ सारी खुशी कभी कौन भला …

आज मैंने देखा है- ऋतुराज

आज मैंने देखा है- एक कली मुरझाई सी कैद स्वर्ण पिंजरे में थोड़ी क्षुब्ध थोड़ी शरमाई सी। आज मैंने देखा है- अंजन भरे लोचन से स्वप्नाश्रु झरते हैं अधरों …

हैरां हूं:Er. Anand Sagar Pandey,”अनन्य देवरिया”

**********हैरां हूं***********   ऐ वक्त ! तेरे बदले हुए दस्तूर पे हैरां हूं, जो जख्म हुआ नासूर उसी नासूर पे हैरां हूं l     अब भी भटकता है …

धीरज जाने कब टूटेगा:Er. Anand Sagar Pandey,”अनन्य देवरिया”

मेरे सीने से भी प्यार की खुश्बू आये मुमकिन है, मेरी आंखें भी प्रियवर के स्वप्न सजायें मुमकिन है, मेरी उंगली भी सावन सी जुल्फों में खो सकती है, …