Category: अज्ञात कवि

अकेले सूरज से ही पुरे ब्रम्हांड में रोशनी होती है – अनु महेश्वरी

बिन मेहनत मिला धन कभी टिकता नहीं, मेहनत से मिली सफलता जाहिर होती है| बस पैसो से जो रिश्ते बनते वो टिकते नहीं, स्नेह से बंधा रिश्ता ही केवल …

बचा ले तू अपनी सृष्टि – अनु महेश्वरी

तूने बनाई, भगवन इतनी सुन्दर दुनिया, रंग बिरंगे फूलों से महकाई तूने वादियाँ| कहीं पे है ऊँचे पर्वत, तो कहीं नीली झील, कहीं सागर का पानी गहरा, कहीं नदियों …

खुदा की मर्ज़ी

शीर्षक-खुदा की मर्ज़ी वो तेरा मेरी ज़िन्दगी में आना है नेमत खुदा का है खुदा की मर्ज़ी तुमसे मेरा मिलना सांसो को तेरा एहसास दिलवाना तेरी आँखों में अपनी …

वजूद

आंखों की यह पलकें झपका के तो दिखा सच बताऊ यह भी ना कर पाएगा। उस परमात्मा के कारण ही तेरा वजूद है उसके बिना, मिट्टी में मिल जाएगा। …

सागर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

बूंद बूंद से सागर भरता झिलमिल नदियों की सागर पत्थर पहाड़ कंकड़ चलके छलछल भरती ये गागर । हीम प्रपात ये झरने सारे देख रहे कितने सदियां मचल मचल …

अरमान – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

    अरमान मेरे दिल का अब निकलने नहीं देते नाहक मेरे हरीके-बहार मुझे चलने नहीं देते।   हम तो गदा-ए-इश्क में अब सब कुछ भुला गये एक तुम …

हम सब यहाँ एक इम्तिहान रोज देते है – अनु महेश्वरी

हम सब यहाँ एक इम्तिहान, रोज देते है, जिस का परचा, खुद ईश्वर लिखते है| जो भी इसे, सरलता से ले लेता, वही, जीवन, सादगी से जी लेता| जो …

ख्वाब

कुछ ख्वाब जिन्दगी में हमेशा अधूरे रह जाते हैं। अरे दूसरों को क्या समझाऊ मैं, अपने ही समझ नहीं पाते हैं। अरे हमसे भी तो पूछ कर देखो, हम …

माँ-बाप

तले है जिसके बचपन खेला तले है जिसके हुआ जवान देख आँखों में आंसू आते गिरता अब वो वृक्ष विशाल जड़े है इसकी कितनी गहरी कितने लम्बे इसके है …