Category: अज्ञात कवि

सुझाव – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

लाज के लेहाज के इलाज करऽ भाई माई बेटी बहन के बचाव करऽ भाई। बदलऽ नजर आपन मतिओ सुधारऽ मनवें में आपन चुनाव करऽ भाई। करऽ न अनर्थ ब्यर्थ …

मिल जायेगा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ढूंढोगे तो मिल जायेगा देर किये तो निकल जायेगा। संहलने के लिए वक्त कम है हाथ से वो फिसल जायेगा। खता क्या हुई कुछ पता नहीं टूटा ये दिल …

विकास – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

गरीब जहाँ था, वहीं खड़ा है शोषन कर रहा, वही बड़ा है। जिसने भी आवाज उठाई जान भी देने को, अड़ा है। फिर गरीब किसान ही मरता मजदूर क्या-क्या …

अपराध – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हम में ही चोर डाकू कोई बेईमान है अलग अलग कर्मो से अलग अलग ही पहचान है। छुपा हुआ नाकाब पोश कोई अत्याचारी है बेखौफ घूम रहे सनकी कोई …

साहित्य परिवार का साथ (तीन )-Bhawana Kumari

न जाने वह सुबह कब आएगी जब मैं अपने सपनों को दलदल से बाहर निकाल आशाओ की रथ दौड़ाऊंगी । अगर mill जाए “‘किस्कु’, ‘ अनु ‘,’राजीव,’विजय’, मनुराज’,’अरुण तिवारी’जी …

नहीं हो तुम कमज़ोर – अनु महेश्वरी

  रोज़ हो रहा चीरहरण, पर बचाने, कोन है आएगा? उठो, बनो वीरांगना, खुद को ही सम्भलना होगा, मूक बने इस समाज में खुद को ही बचाना होगा| इस …

सुलह…. मधु तिवारी

🌹सुलह🌹 ….मधु तिवारी मनुष्य सामाजिक प्राणी है, भरे हैं मन में भाव खूब। प्रेम करुणा घृणा विकार, ईर्ष्या-द्वेष में चला है डूब। साथ रहो तो भाव सभी, हरदम जागृत …

गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

भोजपुरी गीत काहे बइठल बाड़ू मनवां के मार ए गोरी लागत नइखे काहे जियरा तोहार ए गोरी। विरह के आग में जलत बाड़ू काहे याद पिया के अब काहे …

शिक्षा, शिक्षा नहीं रही।

शिक्षा, शिक्षा रहीं नहीं, व्यापार बना अब डाला है। मंदिर कहलाता था विद्यालय, अब वहाँ स्वार्थ ने बागडोर संभाला है। व्यवहारिक शिक्षा का पतन हुआ, संस्कार जीवन में कैसे …

आस्तिन का सांप – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

आग मत लगाओ, अब दाग मिटाओ कुण्डली मार बैठा, नाग भगाओ। आस्तिन का सांप, फन काढ़े बैठा उस दुश्मन का पुराना राग हटाओ। घर से लेकर बाहर तक पहचानो …

मेरा मुल्क किस तरफ जा रहा है..Raquim Ali

आते-आते अब मेरे देश में एक ऐसा अज़ीब ज़माना आया है; बलात्कारी-हत्यारे को समर्थन देकर वकीलों ने प्रदर्शन करके हीरो बनाया है। अब तो बलात्कार और हत्या का भी …

ख्याल बदलिए – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ये दुनिया धन के लिये रोती बहुत है पाने के ख्याल में सोचती बहुत है। किस किस को क्या क्या समझाये अब हम ले जाना नहीं पर बटोरती बहुत …

दिल की आरमां – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

प्यार ऐसा किये कि बदल ही गये मेरे दिल के आरमां मचल ही गये। था भरोसा नहीं फिर भरोसा किया प्यार मंजिल को पाने निकल ही गये। जिगर में …

बेवकूफ़ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

चंदन की लकड़ी समझ, मैं बबूल घीसता रहा मूर्खता थी मेरी, जो उसूल पीसता रहा चापलूसी, ठग बजारी से, कहाँ तक बचियेगा जिसे वाटर प्रूफ समझा, वह भी रीसता …

नादानियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

याद आने लगे हैं वो यादों के पल कुछ ख्यालों में आ गया बीता जो कल। अब तो तन्हा भी रहना गवारा हुआ इश्क मुहब्बत का कैसा देखो ये …

एक मुक्तक : न हो अब दिल्लगी दिल से…

दिखा प्रतिबिम्ब दर्पण में सहज यह भाव आया है. तुम्हारा साथ ऐ साथी हमारे मन को भाया है. समर्पित भावना हो यदि शिकायत ही कहाँ होगी, न हो अब …