Category: अज्ञात कवि

मृदुल वाणी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

उनके मुख मृदुल वाणी से रस अमृत सुधा बरसता है उनके प्रखर मुख मंडल से ऐसे ये भाल चमकता है। ज्ञान पराग की तुमड़ी से केसर का चूर्ण छलकता …

पाहन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

पाहन में विश्वास है इतना, मत पूछो मेरे यार धर्म संस्कृति इसी से चलती, मत पूछो मेरे यार। इस देश का माटी चंदन, जहाँ अमृत गंगा जल है जगह …

अमर गाथा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जिसने गीता कुरआन लिखा है रामायण का गुणगान लिखा है। बाइबिल – गुरुग्रंथ इतना प्यारा कृष्ण लीला रसखान लिखा है। डूबे तुलसी बाल्मीकि डूबे भक्त हरि का सम्मान लिखा …

मंजर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

लुत्फ़ – ए-रवानी का अब सिलसिला देखिये इस बाग – ए – चमन में फूल इक खिला देखिये। है कितनी दिलकश, नहकतों वाली मंजर अब्रे बहार, इनकी शिकवा न …

माँ — मधु तिवारी

💐माँ 💐 …. मधु तिवारी माँ तेरी ममता का, मोल नहीं है। इससे ज्यादा कुछ,अनमोल नहीं है। कोख से जनम दिया,अमृत पिलाया है एक-एक निवाला, तूने खिलाया है तेरे …

जगदम्बे भवानी- Bhawana Kumari

है माँ दुर्गे जगदम्बे भवानी तू तो विद्या दायनी है तेरी महिमा अपरंपार तेरे खेल निराले है कभी काली,कभी गौरी बन तो कभी सरस्वती बन कर नित नए रूप …

कैप्सूल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

फायदा थोड़ा भी नहीं, न ज्यादा नुकसान करेगा सत्तू आटे की बनी कैप्सूल, न कोई पहचान करेगा। दवा के नाम पर, आज भी लूट अभी तक जारी है लोग …

संकट – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

संकट अगर आज है, तो कल टल जायेगा भरोसा रखिये, हंस कर निकल जायेगा। ज्यादा दिन तक, कोई भी रुक नहीं सकता मेहमान सा, अपने आप वह चल जायेगा। …

कुण्डलियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कुण्डलियाँ 01 काल रुके ना बात से, ज्ञान बिके ना हाट टले नहीं होनी कभी , मृत पड़े जब घाट। मृत पड़े जब घाट, लगे सब रोने – धोने …

दुनिया – अनु महेश्वरी

झुठ ने इतना पैर पसार लिया, विश्वास हिचकोले खाता अब। संदेह ने नज़रों में घर जो किया, भरोसा भी तो डगमगाता अब। दिल की कैसे कोई सुने जब, दिमाग …

मुक्तक – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

01 वाह रे इंसान,  जूल्म देख क्यों चुप रहता है क्यों नहीं आगे आता, बुजदिल सा छुप रहता है। जुबां पे ताला बंद रख, कुछ न बोल पाता है सुस्त …

कह दू…..””””””””””””’,,”””””””सविता वर्मा

तेरे एहसास की दौलत लेकर धनी हूँ मैं इन्हीं सतरंगी तेरे यादों से ही सनी हूँ मैं कहते हो, बडी़ खूबसूरत है तेरी आहट बिना तेरे एहसास, खुद को …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

एक कहानी पर अधारित चंद दोहे। 1 भारी कलियुग पड़ रहा, मानव मन के साथ, दिल भी पत्थर हो गया, इस कलियुग के हाथ। 2 कुमकुम निकली सैर को, …

दोहे -बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

घड़ा काठ का आग पर, चढ़े न दूसर बार निकली बात जुबान से, फिर आवे ना यार। दूध का जला छाछ भी, फूंके, पीये लोग डरते हैं बलवान से, …

देश प्रेम के दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सच्चे प्रेमी देश के, हम सब जो भी लोग रहते डूबे भक्ति में, तनिक न करते लोभ। सच्चे सैनिक देश के, रख लेते हैं मान पूजा उनकी है रक्षा …

मेरी जिंदगी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है मेरी जिंदगी ना जाने क्या – क्या खेल दिखाती है मेरी जिंदगी। हम तो गफलत में ऐसे इसी तरह भटकते रहे अबतक …

भाईचारा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

समझो क्या है भाई चारा बिन इसके है कहाँ गुजारा। बिन मेल कुछ कहाँ है संभव साथ मिले तो दिखे किनारा। हर प्रयास में संग जरूरी है सफल जब …

हलचल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सुरमई आँखों में काजल क्या बात है गली में हो रही हलचल क्या बात है। उनकी नाज वो नखरे जान ले लेगी हो जायेंगे कत्ल कितने क्या बात है …

छंद – (कुण्डलियाँ) – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

नहीं चाहिये प्रीत अब, नहीं चाहिये मीत इज्जत अपनी बेचकर, नहीं चाहिये जीत। नहीं चाहिये जीत, दुनिया अंधी हो गयी कैसे यह सब रीत , इतनी गंदी हो गयी। …