Category: अज्ञात कवि

प्रेम दिवस

लो फिर आया ये प्रेम दिवस प्रदर्शन का अनोखा दिवस सच अगर प्रेम दिवस है ये, तो प्रदर्शन की क्या आवश्यकता अंतर्मन की नैससर्गिक भावना को किसी सहारे की …

महाशिवरात्रि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी महाशिवरात्रि निष्ठापूर्वक अनुनय-विनय करने की एक रात की जग राता । चंद्र और सूर्य का योग परम धाम मोक्ष प्राप्त करने की अवधि। बहुत सारे दंतकथा …

पकौड़ी नीति – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

गलती तभी होती है जब कोई भी विकल्प नहीं होता समस्या जस की तस रह जाती,काया कल्प नहीं होता। उत्पादन कम और बड़ी जन समूह, कौन बचाएगा इसे खेत …

एक यात्रा है ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

कोई गणित नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों हम लाभ हानि का हिसाब करे? आश की उम्मीद है ज़िन्दगी, रास्ते, चाहे हो, उतार-चढ़ाव भरे| जंग का मैदान नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों …

नटखट श्याम – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

छनन छनन बजे पायलिया मोरी नटखट श्याम सांवर चित चोरी। बंशी वट घट पनिया भरन को यमुना तट सट गौआ चरन को विहसी ग्वाल बाल करे छिछोरी नटखट श्याम …

बस रहे हम हिंदुस्तानी – अनु महेश्वरी

केवल अँधेरे की बातें करने से, यह दूर नहीं होगा, हर एक को दीया जला, जहाँ रोशन करना होगा| शिकायतों का दौर छोड़ अब कुछ कर दिखाना है, अपना …

संहल के रहना – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

विश्वास करना भरोसा भी रखना मगर मेरे साथी संहल के रहना। मुश्किल बड़ा है दुनिया में जीना धोखे हैं इतने जहर जैसे पीना। सहारा देना मरौअत भी करना मगर …

हे भारत ! हे भारती !

शीर्षक–हे भारत! हे भारती ! जहाँ शिव के जटा से निकली गंगा की धार है जहाँ घर-घर में कामधेनु का दुलार है वीरो की वीरभूमि बलिदानों से भरी अद्भुत …

मेरी कलम 10…..काजल सोनी

कामयाबी ने फरमान भेजा कि पा ले मुझे….. मगर जिम्मेदारी ने मेरे वहाँ तक पहुँचने न दिया…….! खुले दिल का था जो हारता रहा सबसे….. मगर खुशमिजाजी ने मेरे …

मयकदा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

जब से देखें हैं सूरत तुम्हारी माँ कसम हम फिदा हो गये हैं। हमको मालूम नहीं था ये मंजर मिल के ऐसे जुदा हो गये हैं। अब जीना भी …

काश, ऐसे भारत का निर्माण अब हकीकत हो – अनु महेश्वरी

हर इंसान बने, अब अच्छा, नाता जोड़े, लोगो से सच्चा, छल कपट और दुर्भावना का यहाँ न कोई स्थान न हो, देश तोड़ने वालो का इस जहाँ में अब …