Category: अज्ञात कवि

सफलता बड़ी या अपने – मनुराज वार्ष्णेय

सफलता ऐसी हो जिसका दूर दूर तक नूर हो जाये कर्म ऐसे करो जो दूर दूर तक मशहूर हो जाये आगे बढ़ते बढ़ते बस इतनी बात का ध्यान रखना …

एक शाम बेवफाई के नाम- मनुराज वार्ष्णेय

छोड़ कहाँ तुम चले गए हो और कहाँ तक जाओगे उम्मीद रखूँ मैं लौटने की या जीवन भर तड़पाओगे मदिरा बनेगी मेरी साथी दिन रात मैं इसको पीऊंगा रूठ …

बसंत सा प्यार – मनुराज वार्ष्णेय

आज पूछ रहे है ये लोग कि अब हम शायरियाँ नही लिखते है हर पल खुश रहते है ऐसा क्या हुआ जो अब उदास नही दिखते है उन लोगों …

नेकचंद ///// ~Gursevak singh pawar

अरे दूर-दूर तूं जाकर अपने सपने देख है पाया, जगह-जगह तूं जाकर अलग-अलग पत्थर है ला पाया, लोग कूड़ा कर्कट फेंक है देते, उसे उठा तूं है लाया, तराश …

अब्दुल कलाम, तुझे मै करता रहूँ हमेशा सलाम !! ~Gursevak singh pawar

देश को बुलंदी पर पहुँचाने वाला, अपने आप को देश के लिए बनाने वाला !! अब्दुल कलाम, तुझे मै करता रहूँ हमेशा सलाम !! ख़ुशी-ख़ुशी तुम ने अपना जीवन …

उधम सिंह सरदार… ~Gursevak singh pawar

उधम सिंह सरदार… देश की शान बचाने वाला, देश का मान बढ़ाने वाला !! उधम सिंह सरदार… पंजाब की मिटटी मे पैदा होकर, तुमने गुरुओं का मान बढ़ाया !! …

भारत मेरा देश सलोना आगे बढने का कम यंहा कोना ~Gursevak singh pawar

दोस्तो यह मेरी नई कविता उन यवाओं की स्थिति बताती है जो आज युग मे भी आगे नही बढ़ पा रहे आज के इस टेक्नोलॉजी के युग में भी …

विरह का साथी – मनुराज वार्ष्णेय

बगीचे मे बैठा था यादों में खोया था तभी एक तितली मेरे पास आकर बैठ गयी शायद कुछ कहना चाहती थी अपना हाल सुनाना चाहती थी पर मैं तो …

फिरोजाबाद की गलियाँ देखो, यूपी की रंग-रलियाँ देखो,….~Gursevak singh pawar

फिरोजाबाद की गलियाँ देखो, यूपी की रंग-रलियाँ देखो, चन्द्रमा की रोशनी की ठंडक से भी ठंडा न होता, वहां का जीवन, लोगो का वो सुहाग बनती, अपने आप को …

मेरे घर में मेरे सिवा कोई………~Gursevak singh pawar jakhal

मेरे घर में मेरे सिवा कोई समझाने वाला नही था, मैं गर सो जाता तो कोई जगाने वाला नही था !! गमो के खंजर लगे थे सीने से मेरे …

ए-रूबरू जिंदगी क्या बुनियाद तेरी… ~ Gursevak singh pawar

रूबरू ए-जिंदगी क्या बुनियाद है तेरी, कंहा से तू शुरू हुई, कहाँ पर ले जाएगी !! बचपन में तू शुरू हुई, बुढ़ापे में ले जाएगी, साथ तेरा है झूठा, …

बिटिया तेरी क्या जिंदगी क्या तेरी प्रशंसा.. ~गुरसेवक सिंह पवार जाखल

बिटिया तेरी क्या जिंदगी क्या तेरी प्रशंसा, तेरा जन्म न होने देते लोग हमारे देखो, कहते है बेटा हो जाए, वरना ठोकर मारे हमको, अगर तुमको कोई ले आए, …

लगता है देश में फिर से चुनाव आ गया -मनुराज वार्ष्णेय

गूँज उठी है धरती मेरे प्यारे हिंदुस्तान की निकल पड़ी है रैली राजनीति के शैतान की उठ रहा है अँधा धुआँ चलती सर्द हवाओं से रचा जा रहा नया …

यादों की बारात – मनुराज वार्ष्णेय

सब कुछ होते हुए भी बंदिशों में गुजारा किया करते है रसपान को छोड़ कर जहर का घूँट पिया करते है दिल की बीमारी से जूझ रहे है फिर …