Category: अज्ञात कवि

बेटियों, से ज़िन्दगी होती है – अनु महेश्वरी

समय कब पंख लगा उड़ गया, कितना कुछ अब है बदल गया, जिसे अंगुल पकड़, मैंने चलना सिखाया था, आज वह चलते वक़्त, मेरा हाथ थाम लेती है, जिस …

मोर पिया – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

सजनवा रे मोर घरे अइबा कि नाहीं मोर घरे अइबा कि नाहीं अइबा कि नाहीं सजनवा रे मोर घरे अइबा कि नाहीं । सास ननद जी मारेले ताना हमरे …

गीत -संभावनाओं के स्वर -शकुंतला तरार

गीत-27-6 -2017 संवेदनाओं को अपने स्वर दीजिए भावनाओं को थोड़ा मुखर कीजिए || कोरी कल्पनाओं से नहीं बनती ये ज़िंदगी समस्याओं से घबरा के नहीं चलती ज़िंदगी उपेक्षाओं को …

मानव मन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

कमजोरी – गुस्सा – चिड़चिड़ापन आने लगे  हैं  सबमे । घृणा – जलन – बिद्रोह रंग जमाने लगे   सबमे । बहस  – बकवास – प्रतिरोध क्यों छाने लगे  मन में । …

समय

समय की मार ने मुझको ऐसा मारा, आज मैं खुब रोया और पश्चताया। सच कहते थे पापा और मम्मी, बेटा तुम समय के मोल को पहचानो। तुम अगर समय …

नाजुक कंधे

छोटे बच्चे नाजुक कंधे, नाजुक कंधे भारी बस्ते, बोझ कैसे उठाऊ मैं, रोज सुबह मम्मी मुझे जगाती, दौड़ा दौड़ा कर ब्रश कराती, रगड़ रगड़ कर मुझे नहलाती, कभी चिलाती …

कामयाबी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

जब भी कोई ख्यालों के समन्दर में बहकर चला जाता है कुछ पल के लिए ही  सही  वह दिल में उतर आता है  । ढूंढता है मोती जैसा कुछ …

न झगड़े आपस में हम – अनु महेश्वरी

कठिन है राहे, मुश्किल है रास्ते, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, और न जाने कितने, अनगिनत परेशानिया के साथ है सफ़र, मंजिल अभी दूर है, पर साथ रहे अगर, भरोशा, …

गीत- सावन ने ली है अंगड़ाई -शकुंतला तरार

 गीत “सावन ने ली है अंगड़ाई” छम-छम-छम-छम स्नेह झर रहे सावन ने ली है अंगडाई, बादल के गजरे गुंथवाकर प्यासी धरती हरषाई || 1-अलकों में पलकों की छाया सांझ …

रक्षा बंधन पे, दे दें यह उपहार, – अनु महेश्वरी

कोन तय करेगा हद क्या है, मेरे, चलने की, खाने की, बोलने की, हँसने की, घूमने की, कपड़ो की, मैं या मेरे अपने या यह समाज, क्यों हम इतना …

हाइकु – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

1 भ्रमित मन कलयुग की माया झूठ का सया 2 राधा – मोहन दो तन एक जान कृपानिधान 3 मानुष तन अनमोल रतन लालच मन 4 प्यासी अखिया साजन …

अपने अंदर का अँधियारा दूर करले – अनु महेश्वरी

कही पर भाषा की है लड़ाई, कही पर अहम् की है लड़ाई, कही पर अस्तित्त्व की है लड़ाई, कही पर बेवजह की है लड़ाई| बस चारो हो रहा है, …