Category: अखलाक़ मौहम्मद खान ‘शहरयार’

हम पढ़ रहे थे ख़्वाब के पुर्ज़ों को जोड़ के

हम पढ़ रहे थे ख़्वाब के पुर्ज़ों को जोड़ के हम पढ़ रहे थे ख़्वाब के पुर्ज़ों को जोड़ के आँधी ने ये ख़्वाब भी रख डाला तोड़ के …

गजल (अश्क)

अश्क किसी हमराह से जाकर हमारी अनकही पूछो ,, उसके अश्क कह देगें सारी दास्तां दिल की ।। 1।। चले थे हम भी इक काफिले के साथ दोस्तों,, सिर्फ …

मैं आशिक़ हूँ बहारों का

मैं आशिक़ हूँ बहारों का फ़िज़ाओं का नज़ारों का मैं मस्ताना मुसाफ़िर हूँ जवां धरती के अंजाने किनारों का सदियों से जग में आता रहा मैं नए रंग जीवन …

जुस्तजू जिसकी थी उस को तो न पाया हमने

जुस्तजू जिसकी थी उस को तो न पाया हमने इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने तुझको रुसवा न किया ख़्हुद भी पशेमाँ न हुये इश्क़ की रस्म …

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं इन आँखों से वाबस्ता अफ़साने हज़ारों हैं इन आंखों… इक तुम ही नहीं तन्हा, उलफ़त में मेरी रुसवा इस शहर में …

दिल से तुझको बेदिली है

दिल से तुझको बेदिली है, मुझको है दिल का गुरूर तू ये माने के न माने, लोग मानेंगे ज़ुरूर ये मेरा दीवानापन है, या मुहब्बत का सुरूर तू न …

दिल चीज़ क्या है, आप मेरी जान लीजिये

दिल चीज़ क्या है, आप मेरी जान लीजिये बस एक बार मेरा कहा, मान लीजिये इस अंजुमन में आपको आना है बार बार दीवार-ओ-दर को गौर से पहचान लीजिये …

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला हर एक ज़ख़्म मेरे दिल …

ये क़ाफ़िले यादों के कहीं खो गये होते

ये क़ाफ़िले यादों के कहीं खो गये होते इक पल अगर भूल से हम सो गये होते ऐ शहर तिरा नामो-निशाँ भी नहीं होता जो हादसे होने थे अगर …

महफिल में बहुत लोग थे मै तन्हा गया था

महफिल में बहुत लोग थे मै तन्हा गया था हाँ तुझ को वहाँ देख कर कुछ डर सा लगा था ये हादसा किस वक्त कहाँ कैसे हुआ था प्यासों …

ये क्या जगह है दोस्तों

ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है हद्द-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है ये किस मुकाम पर हयात मुझ को लेके आ गई न बस …

सीने में जलन

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढूँढे पत्थर की तरह …