Category: सलीम रजा

अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को- SALIM RAZA REWA : GAZAL

.. अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को, शर्मिन्दा कर रहा है कोई माहताब को . कोई गुनाहगार या परहेज़गार हो, रखता है रब सभी केअमल के हिसाब …

चांदनी है या कोई मोतियों की माला है – SALIM RAZA REWA : GAZAL

.. चांदनी है या कोई मोतियों की माला है मेरे घर के आंगन में तुमसे ही उजाला है .. उसकी ही हुक़ुमत है उस का बोल बाला है जिसके …

ग़ज़ल : हुस्न-ए-जाना लब की लाली – सलीम रज़ा रीवा

.. हुस्न-ए-जाना लब की लाली रंग धानी फिर कहाँ वो नहीं तो ग़ुंचा-ओ -गुल रात रानी फिर कहाँ .. दोस्तों संग खेलना छुपना दरख़्तों के तले वो सुहानें पल …

गुलशन में जैसे फूल कली ताज़गी नहीं – GAZAL SALIMRAZA REWA

(बह्र ) (मफ़ऊल फ़ायलात मुफ़ाईल फ़ाइलुन ) !! ग़ज़ल !! गुलशन में जैसे फूल कली ताज़गी नहीं ! तेरे बग़ैर ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी  नहीं !! मैं मिल नहीं सका तो ये कैसे …

क़त्आ ( मुक्तक )11फिर से खुशिओं के अब्र छाएंगे 

oo फिर से खुशिओं के अब्र छाएंगे !! डूबते तारे झिल मिलाएंगे !! माना पतझड में हम हुए वीरां !! अब की सावन में लहलहाएँगे !! oo doobte tare …

मुझको   मेरे  नसीब  से  कोई नहीं गिला

ग़ज़ल – मुझको   मेरे  नसीब  से  कोई नहीं गिला ! जिसके था जो  नसीब में उसको  वही मिला !! जिसको वो चाहे उसको वो शोहरत आता करे ! उसके   वगैर   हुक्म  न  पत्ता कोई हिला !! मिलता है वो सभी से खुलूशो …

क़त्आ ( मुक्तक ) 9 जब से उनकी मेहरबानी हो गई

oo जब से उनकी मेहरबानी हो गई !! जिंदगी अब रात रानी हो गई !! उसने  माँगा जिन्दगी सौग़ात में !! नाम उसके जिन्दगानी हो  गयी !! oo jab se unki mehrbani ho gai !! zindgi ab …

क़त्आ ( मुक्तक ) 8 चाँद सूरज में सितारों  में तेरा

oo चाँद सूरज में सितारों  में तेरा नाम  रहे !! हाँथ में तेरे सदा खुशिओं भरा जाम रहे !! तेरी खुशहाली की हरपल ये दुआ करते हैं !! तेरे दामन में खुशी सुब्ह रहे शाम रहे !! …

मेरे महबूब कभी मिलने मिलाने आजा-GAZAL SALIM RAZA REWA

! GAZAL ! मेरे महबूब कभी मिलने मिलाने आजा मेरी सोई हुई तक़दीर जगाने आजा ! तेरी आमद को समझ लुगा मुक़द्दर अपना रूह बनके मेरी धड़कन मे समाने …

हक़ बातें तू हरगिज़ ना कह पाएगा – GAZAL SALIM RAZA REWA

हक़ बातें तू हरगिज़ ना कह पाएगा अहसानों के तले अगर दब जाएगा ! मात- पिता का दिल जो कभी दुखाएगा चैन  सुकूं  वो जीवन  भर  ना पाएगा ! तेरी  दुनिया  …

विद्या की तू खान है वीणा वादिनी – NAZAM SALIM RAZA REWA

विद्या की तू खान है वीणा वादिनी  शक्ति तेरी महान है वीणा वादिनी ! तुमसे ज्ञान की खुशबू है सारे जग में  तुमसे ही सम्मान है वीणा वादिनी ! ज्ञान की सागर …

तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं – GAZAL SALIM RAZA REWA

तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं        जां निसार  करते थे जां  निसार करते  हैं  !       ख़ुश रहे  हमेशा  तू  हर ख़ुशी मुबारक  हो   ये दुआ  खुदा से  हम बार – बार  करते हैं ! …

क्यूँ  कहते हो कोई कमतर होता है – GAZAL SALIM RAZA REWA

Gazal क्यूँ  कहते हो कोई कमतर होता है  दुनिया  में  इन्सान बराबर होता है  पाकीज़ा  जज़्बात  है  जिसके सीने में  उसका  दिल  भरपूर मुनौअर होता है  ज़ाहिद का क्या काम …

माना की लोग जीते हैं हर पल खुशी के साथ – GAZAL SALIM RAZA REWA

माना की लोग जीते हैं हर पल खुशी के साथ  शामिल है जिंदगी में मगर ग़म सभी के साथ ! आएगा मुश्किलों में भी जीने का  फ़न  तुझे  कूछ दिन गुज़ार ले तू …

मोतियों की तरह जगमगाते रहो – GAZAL SALIM RAZA REWA

GAZAL ! मोतियों की तरह जगमगाते रहो  बुल बुलों की तरह चहचहाते रहो ! जब तलक आसमां में सितारें रहें  ज़िंदगी भर सदा मुस्कुराते  रहो ! इन फ़िज़ाओं में मस्ती सी छा जाएगी  अपनी …

सिर्फ खुशियां न मेरे संग में मनाने आए  SALIM RAZA REWA

    oo ग़ज़ल oo सिर्फ खुशियां न मेरे संग में मनाने आए  साथ मुश्किल में भी वो मेरा निभाने आए !  प्यार के  मारे  हुए कितने  दिवाने आए  दर्दे  दिल …

सुब्ह रंगी शब् सुहानी हो गई,जब से उसकी SALIM RAZA REWA

ग़ज़ल gazal सुब्ह रंगी शब् सुहानी हो गई जब से उसकी मेह्ररबानी हो गई आप की नज़रें इनायत क्या हुई महकी – महकी ज़िन्दगानी हो गई उसने देखा प्यार …

हँस दे तो खिले कलियाँ गुलशन में बहार आए SALIM RAZA REWA

ग़ज़ल हँस दे तो खिले कलियाँ गुलशन में बहार आए वो ज़ुल्फ़ जो लहराएँ मौसम में निखार आए मिल जाए कोई साथी हर ग़म को सुना डालें बेचैन मेरा …