Category: राजेंद्र तेला ‘निरंतर’

क्यों नफरत से किसी को नफरत नहीं होती

क्यों नफरत से किसी को नफरत नहीं होती किसी सीने में कोई चिंगारी नहीं उठती सिर्फ बात करने से नफरत ख़त्म नहीं होती अपने अहम् की बली देनी होती …

क्या कहूँ ज़माने को

क्या कहूँ ज़माने को ज़माना तो अपनी चाल चलेगा उगते सूरज को सलाम करेगा डूबते को अँधेरे में धकेलेगा हँसते के साथ हंसेगा रोते को रुलाएगा किसका हुआ है …

झीना सा पर्दा

खूबसूरत गुलाबी चेहरा नागिन से लहराते बाल झील सी गहरी नीली आँखें रस भरे पतले होठ मचल करहवा में उड़ता हुआ दुपट्टा तितली जैसे रंग बिरंगे परिधान में परी …

कैसे हाँ कहूँ ? जब ना कहना चाहता हूँ ?

कैसे हाँ कहूँ ? जब ना कहना चाहता हूँ ? पर ना भी कैसे कहूँ? समझ नहीं पाता हूँ झंझावत में फंसा हूँ रिश्तों के बिगड़ने का खौफ दुश्मनी …

प्रिये तुम्हारी मधुर वाणी में कोई गीत सुना दो

प्रिये तुम्हारी मधुर वाणी में कोई गीत सुना दो मेरे अंतर्मन को उल्लास से भर दो खुशी के अंकुर को प्रस्फुटित कर दो निराशा के भावों को आशा कि …

खून जब बन जाता है पानी

खून जब बन जाता है पानी मर्यादाएं हो जाती हैं ध्वस्त संतान निकम्मी हो जाती प्रताड़ित करती माँ बाप को रोती है धरती रोता है आकाश रोते हैं माँ …

कौन कहता है ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते

कौन कहता है ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते ऊंचे लोग धरातल से जुड़े नहीं होते हुए हैं इस देश में नेता गाँधी,सुभाष,पटेल जैसे भी ना अहम् …

मन के घोंसले की नन्ही चिड़िया

मन के घोंसले की नन्ही चिड़िया निरंतर उड़ान भरने को आतुर ना विश्राम , ना चैन उसको ये भी पता नहीं कितना उड़ना है ? कहाँ जाना है ? …

महकेगा वही फूल,जो खिला हुआ है,

महकेगा वही फूल, जो खिला हुआ है, बिना खिला फूल, एक सपना अधूरा है बुझेगा वही दिया, जो जला हुआ है, बिना जला दिया, एक मकसद अधूरा है जीवन …