Category: रफीक रीवानी

यही आजकल मेहरबां देखते हैं, [गज़ल]

यही    आजकल    मेहरबां     देखते     हैं, मेरा दिल जला के धुआं देखते हैं !! ….. वो   क़द से    बड़ा    आसमां    देखते हैं, कहां    पर    खड़े   हैं कहां   देखते    हैं !! ….. बहुत याद …

संगमर-मर की ना तरीफ किया कर मुझसे | [क़ता]

संगमर-मर की न  तरीफ   किया   कर मुझसे  । आंसुओ से जो मै अह्कामे मुहम्मद लिख दूं । चूमने के  लिये झुक जायेगा ये ताज-महल । टूते पत्थर पे अगर नामे मुहम्मद लिख दूं …