Category: प्रेम नरायन

रिश्ता हर, दीवार सा लगता है

रिश्ता हर, दीवार सा लगता है झूठा इश्तहार सा लगता है, प्यार मोहब्बत सीधे-सादे रस्ते है, चलना इन पर तलवार सा लगता है, खुदगर्जी ने दोस्त बनाये बहुत मगर …

घायल को अस्पताल ले जाने वाले

राह में किसी घायल से कतरा के निकल जाने वाले , अब नहीं मिलते उन्हें अस्पताल पहुँचाने वाले . उन्होंने गरीबी की एक रेखा खींच रखी है , जिसमे …

ओबामा के देश में मनाऊ सबकी खैर

ओबामा  के देश में मनाऊ  सबकी खैर , ना  काहू  से दोस्ती ना  काहू  से बैर . आँगन-आँगन  दीवारे है छतों  का छूटा  संग , तारों में उलझी हुई है …

मुस्कुराहटों ने भी पहचान लिए है

मुस्कुराहटों ने भी पहचान लिए है , अपने-अपने चेहरे , बेशर्म मुस्कराहट रहनुमाओ के चेहरों पर , आम आदमी के चेहरों पर बेबसी की मुस्कराहट , ये यही चिपके …

मेरे शहर में है एक अलसाया हुआ बाज़ार

मेरे शहर में है एक अलसाया हुआ बाज़ार , महंगाई की मार से मुरझाया हुआ बाज़ार , सड़कें बोलती है बहुत तो गलियां है खामोश , हादसे के गवाह …

दूर के ढोल सुहाने निकले

दूर के ढोल सुहाने निकले वे भूखमरी मिटाने निकले, कितना कौन गरीब यहाँ है एक से एक पैमाने निकले, कहाँ मिलेगा सस्ता खाना नेता लोग बताने निकले, घोटालो के …

अक्सर तो चुप रहना पड़ता है

अक्सर तो चुप रहना पड़ता है, बाकी सुनना तो सबका पड़ता है. सांत्वना देने वाले कब के लौटे, दुःख अपना खुद सहना पड़ता है, गम का चादर कितना भारी …