Category: ज़िया फतेहाबादी

होश में करके बेख़बर होश में फिर न ला सके

होश में करके बेख़बर होश में फिर न ला सके । ऐसे हुए वो परदापोश ख़्वाब में भी न आ सके । चाहिए मुझ को एक दिल और वो …

साँचे में जुनूँ के दिल को ढालें

साँचे में जुनूँ के दिल को ढालें, होश-ओ ख़िरद का भेद पा लें । रूख़ से जो नक़ाब वो उठा लें, हम ज़ौक़-ए नज़र को आज़मा लें । ऐ …

शाख़ अरमानों की हरी ही नहीं

शाख़ अरमानों की हरी ही नहीं । आँसुओं की झड़ी लगी ही नहीं । साया-ए आफ़्ताब में ऐ रिंद, तीरगी भी है रोशनी ही नहीं । क़ैद-ए हस्ती से …

शब-ओ रोज़ रोने से क्या फ़ायदा है

शब ओ रोज़ रोने से क्या फ़ायदा है ? गरेबाँ भिगोने से क्या फ़ायदा है ? जहाँ फूल ख़ुद ही करें कार-ए निशतर, वहाँ ख़ार बोने से क्या फ़ायदा है ? उजालों …

वो मुसाफ़िर जो थक गया होगा

वो मुसाफ़िर जो थक गया होगा, रास्ते से भटक गया होगा । गुन्चा-गुन्चा चटक गया होगा, गोशा-गोशा महक गया होगा । आहटें नर्म-नर्म पत्तों की, पेड़ पर आम पक …

रात को जब तारे अपने रोशन गीत सुनाएँगे

रात को जब तारे अपने रोशन गीत सुनाएँगे । हम भी दिल की गरमी से दुनिया को गरमाएँगे । फूल ज़रा खिल जाने दे सहन ए गुलशन में साक़ी, …

रह ए वफ़ा में ज़रर सूदमन्द है यारो

रह ए वफ़ा में ज़रर सूदमन्द है यारो | है दर्द अपनी दवा ज़हर क़न्द है यारो | घटा बढ़ा के भी देखा मगर न बात बनी ग़ज़ल का …

मिरा साया जुदा नहीं होता

मिरा साया जुदा नहीं होता ये कभी दूसरा नहीं होता अजनबी अजनबी ही है लेकिन आशना आशना नहीं होता सुनते आए थे आज देख लिया बेकसों का ख़ुदा नहीं …

पा शिकस्ता रबाब है ख़ामोश

पा शिकस्ता रबाब है ख़ामोश । पर्दा-पर्दा हिजाब है ख़ामोश । ख़ुमकदे में सुकूत का आलम, ख़ाना ए आफ़्ताब है ख़ामोश । थम गई कायनात की गरदिश, शोरिश-ए इन्क़लाब …

देता है जलवा आँख को दावत ही अब कहाँ

देता है जलवा आँख को दावत ही अब कहाँ ? आती है लब पे दिल की हिकायत ही अब कहाँ ? ये ग़लग़ला ये शोर ये हँगामा शाम-ए ग़म, है इन्तिज़ार-ए …

दुनिया मेरी नज़र से तुझे देखती रही

दुनिया मेरी नज़र से तुझे देखती रही । फिर मेरे देखने में बता क्या कमी रही । क्या ग़म अगर क़रार-ओ सुकूँ की कमी रही, ख़ुश हूँ कि कामयाब …

तुम चले आए तो सारी बेकली जाती रही

तुम चले आए तो सारी बेकली जाती रही । ज़िन्दगी में थी जो यकगूना कमी जाती रही । दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है जिस को देख कर, …

तमाशा है सब कुछ मगर कुछ नहीं

तमाशा है सब कुछ मगर कुछ नहीं । सिवाए फ़रेब-ए नज़र कुछ नहीं । ज़माना ये है रक्स-ए ज़र्रात का, हिकायात-ए ओ क़मर कुछ नहीं । सितारों से आगे …

गीत तेरे हुस्न के गाता हूँ मैं

गीत तेरे हुस्न के गाता हूँ मैं । चाँद की किरणों को तड़पाता हूँ मैं । मंज़िल ए मक़सूद होती है क़रीब, रास्ते में जब भटक जाता हूँ मैं …

ग़म ए उल्फ़त में जान दी होती

ग़म-ए उल्फ़त में जान दी होती । ख़िज्र की उम्र मिल गई होती । ताक़त-ए इन्तिज़ार थी कि न थी. जुर्रत-ए इन्तिज़ार की होती । न हुआ हुस्न मूलतफ़ित …