Category: वीना श्रीवास्तव

कविता-मकरंद की मिठास

मुझसे किसी ने कहा कविता है पार्थिव शब्दों का संसार मैं नहीं मानती इन शब्दों में भरी है मकरंद की मिठास सुमन की गंध की महक प्रिया के श्रंगार …

बेबस मन

आजकल भागता है मन तुम्हारी तरफ अधिकार नहीं रहा स्वयं पर प्रत्येक क्षण मिलने की प्रबल इच्छा तुम्हें देखने की चाहत तुम्हारी बाहों में स्वयं को पाने का आभास …