Category: स्वाति नैथानी

ज़रा सी है ये ज़िन्दगी…..

ज़रा सी है ये ज़िन्दगी….. ज़रा सी है ये ज़िन्दगी क्यों लेकर चलें साथ शिकवे और शिकायतें जो लम्हे खूबसूरत मिलें वही निशानी , वही सौगात ज़रा सी है …

सफर…

सफर… छोटा ही सही खूबसूरत था ये सफर मुक़्तलिफ रंग देखे हसीं थी सुबहें ,शायराना हर पहर दीवानगी बना मेरा साया ख्वाब के बुलबुले में मैं तैरने लगी ज़िन्दगी …

फिलहाल…( स्वाति नैथानी )

फिलहाल … (स्वाति नैथानी ) आता जाता दिन बुलाता है मुझे चाँद सूरज वादे याद दिलाते हैं मुझे फिलहाल सपनों में तैरना है मुझे। सच्ची झूठी ख्वाहिश खींचती अपनी …

नाकाम कोशिश …… स्वाति नैथानी

सुबह से ये वादा किया शाम को अपनी ज़ुबान दी उनसे हर नज़दीकी मिटा देंगे फासलों को आगोश में ले लेंगे यादों में भी याद न करेंगे एहसास लफ्ज़ …

उससे पह्चान कर ली मैंने…… स्वाति नैथानी

उसकी हसीं में लिपटा दर्द छू लिया मैंने दिल में सुलगती चिंगारी से जल गई रूह की सिसकती दास्ताँ सुन ली मैंने उसकी ख्वाहिशों के समंदर में घुल गई …

जज़्बा…स्वाति नैथानी

जज़्बा मंज़िलों को क्यों तलाशूँ मैं जब राहें इतनी हसीन हैं फ़िज़ा की रंगत फीकी पर गयी मेरा तो साया भी रंगीन है किस्मत से क्यों हारूँ मैं हौंसलों …