Category: सुमित्रा नंदन पंत

अनुभूति

तुम आती हो, नव अंगों का शाश्वत मधु-विभव लुटाती हो। बजते नि:स्वर नूपुर छम-छम, सांसों में थमता स्पंदन-क्रम, तुम आती हो, अंतस्थल में शोभा ज्वाला लिपटाती हो। अपलक रह …

दो लड़के

मेरे आँगन में, (टीले पर है मेरा घर) दो छोटे-से लड़के आ जाते है अकसर! नंगे तन, गदबदे, साँबले, सहज छबीले, मिट्टी के मटमैले पुतले, – पर फुर्तीले। जल्दी …

उमर ख़ैयाम की रुबाइयों का फारसी से हिन्दी में अनुवाद -1

वह प्याला भर साक़ी सुंदर, मज्जित हो विस्मृति में अंतर, धन्य उमर वह, तेरे मुख की लाली पर जो सतत निछावर! जिस नभ में तेरा निवास पद रेणु कणों …