Category: सुधा ओम ढींगरा

बदलाव

 सूखे पत्तों को उड़ते देख ऋतु ने 
प्रश्न किया…. क्या तुम्हें मेरे साथ की इच्छा नहीं रही? पत्तों ने कहा…… हम तो 
बूढ़े, बेकार 
हो गए, सोचा, क्यों ना …

स्मृतियाँ

स्मृतियाँ चाँद को देख आँखें मूँदनी पड़ीं..
.. बिन बुलाए
 बेमौसम झरती फुहारों सी स्मृतियाँ जब उनकी चली आईं…. अश्रुओं की धार बहाती हृदय व्यथित करती इच्छाओं को तरंगित करती …