Category: सुभद्रा कुमारी चौहान

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी दूर फिरंगी को करने …