Category: सोनिका मिश्रा

मुझे कुछ दिनों की, मोहलत तो दे दो!

मुझे कुछ दिनों की, मोहलत तो दे दो! तुम्हारी गली में, यूं न भटका करुँगी!! यादों में तेरी खुद को, सताने तो दो! तुझसे लिपटकर, यूं न रोया करुँगी!! …

सच

कोई जीतने की चाहत रखता है, कोई प्यार की इबादत करता है | बड़ा कमज़ोर है आदमी, सोचता है पाने को मंज़िल, पर हाँथ खाली रखता है || ज़िंदगी …

shayri

मैं जो हूँ वो, कोई जानता नहीं है | शायद कोई यहाँ मुझे,पहचानता नहीं है || खोये है भीड़ में हम, यहाँ कोई सहारा नहीं है | मेरे आंसू …