Category: श्रेया आनंद ‘एंजेल ‘

एक जमाना बीत गया, मोहब्बत का दीया जलाते हुए!

एक जमाना बीत गया, मोहब्बत का दीया जलाते हुए! थकी नहीं, थमी नहीं, ये बेधड़क बेतुकी बात करने की आदतें, तो हर लम्हा ही गुजरा, गम-ए-बंदगी में मुस्कुराते हुए! …

कभी आँखों से…

कभी आँखों से, दिल की हालत बयां करते हैं, कभी निगाहों में, राज छुपाते हैं, कभी ख़ामोशी से, हर बात कहते हैं, कभी खामोश रहकर, दर्द बढ़ाते हैं, क्या …

यु मेरे हमसफ़र बन जाओ!!

तमन्ना यही है, दिल में तुम, तनवीर सा रम जाओ! (tanveer- light) पलकों के चिलमन उठे जब, तुम ही तुम नजर आओ! ज़िन्दगी की मुश्किलतो में तप कर, तक़द्दुस …

मेरा वजूद तुमसे है!

जानते नहीं की तुम कौन हो, लेकिन मेरा वजूद तुमसे है! तुम साथ नहीं मेरे फिर भी, हर-पल तुम्हें महसूस करते हैं! आईने में देख जब झुकतीं हैं पलकें …

मोहब्बत मुकमल होती कहाँ है!!

इस ज़ालिम ज़माने में, मोहब्बत मुक़म्मल होती कहाँ है! कटतीं हैं रातें अक्सर, करवटों के साये में, कि तेरे ख़्वाबों में खोई, सरगोशियाँ सोतीं कहाँ हैं! अब तो सुकूं …

दिल में तेरा, प्यार अब भी है !!

जिन रास्तों की मंज़िल हो तुम, उन रास्तों पर चलने की, चाहत अब भी है! जिन ख़्वाबों के हमनशीं हो तुम, उनसे जुडी पलकें मेरी, झुकी अब भी हैं! …

किसी की हर अदा से, इश्क हमें होने लगे !!

कभी जब दिल की ख़ामोशी कुछ कह न सके, कभी जब आँखों के नजराने, किस्से सुना न सके, खोया-खोया सा हर लम्हा जब रहने लगे, अनकहे लफ्जों में धड़कन …

एक धुंधली सी शाम है, एक रौशन सवेरा है !

एक धुंधली सी शाम है, एक रौशन सवेरा है ! जो देखती हूँ मैं, दिल में झांककर अपने, आज भी धड़कनों की तखत पर, तेरी यादों का पहरा है …

जिन्दा तो हूँ मैं आज भी, दूर होकर तुझसे!!

जिन्दा तो हूँ मैं आज भी, दूर होकर तुझसे, रिश्ता तोड़ लिया खुशियों ने, रूठकर मुझसे, बेवफा मुझे, मेरी सासें भी कहती हैं, आलम-ए-दिल, समझ कर भी न समझती …

ये दुनिया हमें पागल कहती है!

जब जब तेरी याद आती है, तबस्सुम से ग़मों को छुपाते हैं ! ये दुनिया हमें पागल कहती है, युं बेवजह जो हम मुस्कुराते हैं ! क्या कहे क्या …

जब याद तुम्हारी आएगी !

जब रात को आसमान पर, अँधेरे के साए छाएँगे, तब याद तुम्हारी आएगी, दिल को मेरे तड़पाएगी ! अल्फाज थर्थारायेंगे, लफ्ज लफ्ज में कम्पन होगी, जब याद तुम्हारी आएगी …

आलम-ए-दिल कह जाते हैं !!

जो बात हम लबों से कह नहीं पाते, उन्हें स्याही से कागज पर लिख देते हैं! अक्सर वो महज़ अलफ़ाज़ लगते हैं, ग़र हम उन चुनिंदा शब्दों में, आलम-ए-दिल …

ज़िन्दगी को अपनाने चली !!

यादों की गठरी पर, आसुओं की चादर चढ़ा कर, खिलखिलाते लबों से, दर्द का हर नगमा छुपा कर, चुनिंदा खुशनशी लम्हों को, पलकों के आशियाने में सजा कर, फैला …

वो लम्हें याद आते हैं…

ज़िन्दगी के बीते अनगिनत लम्हें, यादों के शामियाने से, कुछ यूँ याद आते हैं, लबों पे एक भीनी सी मुस्कान, पलकों तले थमी नमी, चेहरे की शुर्खियों पर, एक …