Category: सीमा वर्मा ‘अपराजिता’

जैसे हो सावन की प्रथम फुहार,,,

तेरे नैनो से छलक रही है तेरे प्रेम की रस -धार तन – मन मेरा भीग रहा है जैसे हो सावन की प्रथम फुहार,,, खुद को मैं भी जान …

तुम्हारे ही ख्यालों में खोई हुई थी,,,,

ये कुहासे की चादर में लिपटी हुई धरा और बादलों से घिरा हुआ अम्बर, ठण्ड में काँपता सारा जहां सूरज की एक किरण का इंतजार करता, इन सब बातों …

न जाने क्यों मेरे साजन तुम याद बहुत अब आते हो ,,,,,,,

न जाने क्यों मेरे साजन तुम याद बहुत अब आते हो बंद करूँ मैं आँखें तब भी तुम मुझको दिख जाते हो , न जाने क्यों,,,,,,, धड़कन में मेरी …

इंतज़ार तेरा,,,,

वो खामोश सी आहट तेरे क़दमों की , उम्मीदों की देहरी पर जाने कितने चिरागों को रोशन करती है , शाम का सूरज ढलते -ढलते उम्मीदों की किवाड़ के …

नूतन वर्ष

नूतन किरणें ,नूतन प्रभात ,है नूतन यह वर्ष , नूतन ऊर्जा,नूतन खुशियाँ ,है दिलों में नूतन हर्ष ,,,,,, बीत रहा जो साल है वो यादें बन जायेगा , आने …

शब्दों में मैंने बाँधा है,,,,

अपने प्यार में तुमने साजन मुझको ऐसे बाँधा है, झरते हैं भाव हृदय से तेरे शब्दों में मैंने बाँधा है,,,,, जब भी दर्पण की ओर निहारूँ प्रेम से तेरे …

तेरे प्यार को बिंदिया मैं बनाऊँ,,,,

तेरे प्यार को बिंदिया मैं बनाऊँ , बन दुल्हन तेरी माथे पे सजाऊँ , चमकते हैं जैसे आकाश में ये सितारे, वैसे ही चमकती ये मुखड़े पे हमारे, नज़र …

जब तेरी याद ने ,,,,

तेरे ख़्वाबों में खोकर तब मैंने तेरा दीदार किया , जब तेरी याद ने दिल को मेरे हर लम्हां बेक़रार किया ,,,,,, तू क्या जाने तेरे बिन कैसे बीत …

सोनपरी से मिलते होंगे…..

सोनपरी के ख्वाब उन आँखों में भी पलते होंगे, कभी -कभी वो भी ख्वाबों में सोनपरी से मिलते होंगे…… उनके ख़्वाबों की दुनियाँ भी क्या बिल्कुल अपने जैसी होगी …

सिर्फ सच है तेरा प्यार,,,,,,

सिर्फ सच है तेरा प्यार, तू भी झूठा है और अफ़साने भी झूठे है, सिर्फ सच है तेरा प्यार हुआ है कब लफ़्ज़ों में मुमकिन रूहों का इज़हार ,,,,,,,, …

ज़िन्दगी मुझसे रूठ जाये न कहीं,,,,,

मेरी साँसे मुझसे ये कहती हैं जो मौत से हर पल लड़ती हैं ,,, छूटने वाला है अब साथ अपनों का टूटने वाला है हर एहसास सपनों का,,, ज़िस्म …

गुनगुनाने लगी हूँ,,,,,,

खबर जब मिली उनके आने की गीत कोई नया गुनगुनाने लगी हूँ,,, दिल की बगिया भी महकी-महकी सी है, सारी कलियाँ भी चहकी-चहकी सी है, खुशियों से कदम मेरे …

“निर्भया ” की चीखें,,,,

वर्तमान समय में हम इतने व्यस्त हो गए है कि समाज में घटित होने वाली घटनाएं सुबह की चाय की चुस्कियों के साथ शुरू होती है चाय खत्म होते …

वो ख़ूबसूरत पल ,,,,,,

वो ढलता सूरज, वो सिन्दूरी शाम वो हथेलियों पर लिखती तुम्हारा नाम,,, वो आसमान पर तारों की चादर वो चाँद की चांदनी से उजला हुआ अम्बर,,, वो घंटो निहारती …

भूल जाने लगी हूँ,,,,

हर शाम अब दर्द से गुजरती है मेरी, हर रोज़ सामना मौत से होता, फिर भी मेरी नज़रें हँसती लेकिन कभी -कभी ये दिल रोता,,,, टूट रही हूँ लम्हां …

सर झुकाऊँ कैसे,,,,,,,

दर्द कितना है इस दिल में बताऊँ कैसे , मुस्कुराती आँखों के आँसू दिखाऊँ कैसे, मंज़िल सामने है मेरे, रास्ता मुश्किल बहुत, इन मुश्किलों को राहों से हटाऊँ कैसे, …

प्रेमिका मैं बनी,,,,

तू कलम है अगर तूलिका मैं बनी, तूने जो भी कहा भूमिका मैं बनी, प्रेम के इस अनूठे सफ़र में प्रिये कृष्ण है तू मेरा राधिका मैं बनी, तू …

तू महसूस करता है या नही…..

पता नहीं तू महसूस करता है या नही …. मैं हूँ तुझमे शामिल तेरी साँसों की तरह तेरी धड़कनो के साथ धड़कती हूँ मैं तेरी साँसों के साथ महकती …