Category: सन्ध्या गोलछा

शांति

मन है समुन्दर,भावनाएं लहरें, लहरों का मचलना,कोई दस्तक-सी दे गया हो शांत समुन्दर में ज्यूँ.. कोमल छुअन गुलाब-पंखुड़ियों की, हो जाती है कसक,एक काँटा हवा में लहराकर टकरा गया …

रिश्ते

रिश्तों की गर्मी,रिश्तों की नर्मी, कुछ जलता,कुछ पिघलता, कुछ कसकता,कुछ रिसता, रिश्ते जुड़ते हैं,रिश्ते बिगड़ते हैं| गुनाहगार बनाता है एक इन्सान दुसरे इन्सान को, परिस्थितियाँ सहयोगी हैं उसके इस …

डाह

देख लिया पिय-तन पर,ज्यूँ पर-नारी-केश डाह जरी भौंहन हँसी,क्यूँ न होय जिय-क्लेश पिया रैन बिताई सौतन संग,प्रिया-प्रेम बिसराय ऐसो दर्द जगायो हिय में,डाह सों जिय जर जाय सोचत देख …

आओ हम-तुम प्यार करें

स्निग्ध-स्वच्छ-नील-श्याम-धवल, सूर्य-प्रकाश में सागर-प्रवाह-अविरल, मानो झिलमिल इन्द्रधनुषी आँचल| ऊष्म-कणों से सिक्त वादियाँ, यूं है लगता ओस-कण-सिक्त| लजवन्ती नारी तन जैसे, अकुलाया-सा श्वेत-बिंदु-सिक्त| आसमां तड़प रहा जमीं मिलन को, मध्य …

उलझन

ये कैसी उलझन है, उलझन है या बंधन है? कितना मुश्किल और आसान है, प्रकट होना मन की भावनाओं का| ये ख़ुशी,ये गम,ये प्यार,ये उपेक्षा, मिलकर स्थिति कितनी गरीब …