Category: रजनी मोरवाल

गीत – रोटी से मँहगा प्याज़

रोटी से मँहगा प्याज़ रोटी से मँहगा अब बिकता है प्याज़, परत परत छिलके-सी उतर रही लाज । रामधनी खीज रही चूल्हे के सँग, दिन भर की भूखी है …

कोरे काग़ज पर नाम

कोरे काग़ज पर लिख डाला मैंने नाम तुम्हारा, मौसम बनकर डोल रहा है पीड़ा का हरकारा | बदली उड़ती फिरे बावरी बूँदों को लहराके सावन में तरसाई अँखियाँ पथ …