Category: प्रीती श्रीवास्तव ‘पर्ल’

हम किसी से कम नहीं

हमारा शोषण कर के अपना गुरूर दिखाने वाले कहीं ऐसा न हो तेरी हसी पे लगाम हम लगा दें अपने घमंड में मुझको इतना बर्बाद न कर की तेरी …

बिटिया या बेटा

अक्सर बाबा कहते मुझसे बिटिया नहीं मेरा बेटा है तू और ये सोच के आँखें भर जाती मेरी बाबा ऐसा कहते हैं क्यूँ इसी सोच में बैठी थी एक …

बिना नारी, दुनिया बेकार है सारी

मेरा मानना इतना ही है बस नारी बिना, दुनिया बेकार है सारी यकीन ना हो तो एक बार सोचो पाओगे तुम खुद को भी इसके आभारी ब्रम्हांड में देखो …

कमजर्फ लम्हा

बड़ा ही खौफनाक निकला मेरी नादानी का लम्हा कमजर्फ लम्हा बन गया पल में ही मेरी लाचारी का लम्हा उस पल की कथा कैसे कहूँ वो दर्द बयां कैसे …

जिंदगी

तन्हाई के साये में अक्सर, धड़कने साथ देती हैं मेरा दिल गम बाँट लेता है मेरा, यूँ ही मेरा मन बहला कर सन्नाटी रातों की खामोशियाँ, जब डराती हैं मुझे …

नर नहीं, नारी हूँ मै ….

फूलों  भरी  क्यारी  हूँ  मै नर  नहीं, नारी  हूँ  मै ….   आकाश के इन्द्रधनुष का, है समाया मुझमे सात रंग हर एक कली में है भरा, प्यार का …