Category: पद्मा मिश्रा

पिता – के नाम एक कविता

पिता – के नाम एक कविता यह तुम्हारा स्नेह ही तो था, जो संघर्षों के जंगल में, किसी बासंती बयार की तरह, सहलाता रहा मेरे शूल चुभे पांवों को. …

मेरे नव गीत –पद्मा मिश्रा

मेरे नव गीत –पद्मा मिश्रा  सिंक रही हैं भावनाएं रोटियों सी, गोल घिरते जिन्दगी के व्यूह इतने, हर मोड़ पर ज्यों घूमती है गोल रोटी फिर भी कोई आस …

बूंद बूंद की चाह,

लाल भभूका सूरज लगता, झुलस रहे धरती के प्राण,गर्मी की बेरहम दुपहरी,मांग रही है त्राणबादल को तरसे हैं नैना,बूंद बूंद की चाह,पीपल की छाया भी सिमटी,ढूंढ़ रही है छाँह.ज्वाला …

गंगा मैया …

जल क़ि बूंद बूंद अमृत बन , बनती जीवन धारा,विश्वासों का दीप जलाकर,स्नेह-समर्पण सारा.गंगा मैया हर लेना तुम,सारा कलुष हमारा,करूँ अर्चना उस माटी की,कर पावन स्पर्श तुम्हारा.लहरों सा चंचल …

पिता – के नाम एक कविता

यह तुम्हारा स्नेह ही तो था, जो संघर्षों के जंगल में, किसी बासंती बयार की तरह, सहलाता रहा मेरे शूल चुभे पांवों को. फूलों की सेज न सही, हरियाली …

तुम मेरे पास हो …हमेशा!

तुम हो यहीं कहीं,..मेरे आसपास, भींगी पलकें जब यादों का सहारा चाहती हैं,तुम तब भी -मेरे साथ होती हो ..माँ, जैसे मैं तुम्हें छू सकती हूँ,महसूस कर सकती हूँ–''तुम्हारे …

माँ

माँ औपचारिकताओ में में नहीं, हमारी संवेदनाओं में जीती है.. जब हम रोते हैं ,तो रोती है , माँ,हमारी खुशियों में ,सुखों में,हमेशा साथ होती है -माँ',जिंदगी के अकेलेपन …

लॊ दिए की

सहज सार्थकता लिए अभिव्यक्ति मेरी , जल रही हूँ जैसे जलती लॊ दिए की .भावनामय शलभ का सर्वस्व खोना ,और निशि दिन वर्तिका का मृदु समर्पण,प्रीति की वह डोर …

वाणी -वन्दना

मातु विनत  वंदना हमारीतुम्हे समर्पित ह्रुदयांतर से ,मातु विनत  वंदना हमारी, अक्षर अक्षर बांध लिया है ,भाव- सुमन मुक्ताहारों से,स्वर वैभव के गीत रचाकर ,सरगम के स्नेहिल तारों सेविश्वासों  …

क्या संदेशा लाये बादल

क्या सन्देशा लाये बादल, विकसित सुमन हृदय आंगन में नव हरीतिमा मन प्रांगण में, स्मृतियों की बूंदें बरसीं , मधुरिम गीत सुनाये पायल क्या संदेशा लाये बादल ! विरहाकुल …