Category: निर्मला गर्ग

अश्वमेध का घोड़ा

मंच वायदे झंडे नारे हलचलें सारी ख़ामोश हैं खामोश हैं राजनीति के आगे मशाल लेकर चलनेवाले अश्वमेध का घोड़ा अब सरपट दौड़ेगा कौन है जो रास इसकी खींचेगा छत्रप …

भाईवाले घरों में बहनें रहती हैं पार्श्व में

अहोई अष्टमी है यह कार्तिक की तारों को पूजकर व्रत तोड़ेंगी माँएँ ये माँएँ बेटों की हैं बेटियाँ छू रहीं साक्षात् तारे तो क्या बेटियाँ बेटियाँ हैं वंश तो …

गज़ा पट्टी-2

इस्त्राइल तांडव कर रहा है गज़ा मृत्यु-क्षेत्र में तब्दील हो रहा है बुश तो हमेशा अत्याचारियों के साथ रहे पर तुम ? तुम बराक हुसैन ओबामा ! तुमने भी कुछ नहीं …

ह्यूगो शावेज़

कामरेड शावेज़ मै तुमसे प्यार करती हूँ उसी तरह जिस तरह वेनेज़ुएला के लोग तुमसे प्यार करते है जिस तरह सारे महादेशों के शोषित वंचित तुमसे प्यार करते है …

बसरा बगदाद में

खाने की मेज़ पर जब मैं सलाद सजा रही हूँ बसरा बगदाद में टामहाक मिसाइलों की बारिश हो रही है बारिश की आँच मेज़ से गुज़रकर मेरी शिराओं में …

मिथकों से घिरे

मेरी तरफ दौड़ा आ रहा समुद्र पता नहीं कौन-सी सूचनाएँ देना चाहता है कथा कहना चाहता है शायद जगन्नाथ की सुभद्रा की और बलराम की वह कथा नहीं जो …

धन्यवाद से कुछ ज़्यादा

मैं किसी को याद करना चाहती हूँ कहना चाहती हूँ धन्यवाद जैसा कुछ आवाज़ वहाँ तक पहुँचेगी ? वह जगह है पहाड़ के ऊपर एक छोटी-सी राशन की दूकान वहाँ …

मेरी बहनें

मेरी बहनें मेरे लिए चिंतित रहती हैं मैं पूजा-पाठ तो ख़ैर करती ही नहीं ईश्वर के बारे में मेरा मानना है कि वह हमारी तरह कोई जीवित प्राणी नहीं …

मुक्ति का पहला पाठ

करवाचौथ है आज मीनू साधना भारती विनीता पूनम राधा सज-धजकर सब जा रही हैं कहानी सुनने मिसेज कपूर के घर आधा घंटा हो गया देसना नहीं आई ४०५ वालों …

चट्टान

हम अकेले नहीं हैं हमारी यात्राओं के बीच यह चट्टान उपस्थित है इसके किनारे घिस चुके हैं त्वचा सख़्त है मगर रूखी नहीं रंध्रों में इसकी थकान समाई है …

दस हज़ार साड़ी

भूतपूरब मुखमंत्री जयललिता जी को ग्रामसेविका राधादेवी का परनाम ‘आरयाबरत’ से मालूम हुआ आपको जेल पठा दिया गया है उहाँ आप करिया कोर बला उज्जर साड़ी पहनेंगी जैसन वहाँ …

सितारा

कितने वर्षों से तुम अपने देश नहीं गई सितारा ? बहुमंज़िली इमारत की इस नौवीं मंज़िल पर बर्तन धोते तुम्हारे कानों में कौन-सी ध्वनि गूँज रही है तुम्हारे जन्म-स्थान खुलना …

कारोबार

अग्रवाल जी का कानपुर में खाद बेचने का व्यापार है श्रीमती अग्रवाल रोज़ाना सुबह तीन घंटे पूजा-पाठ में व्यतीत करती हैं अग्रवाल जी खाद में अलाँ-फलाँ मिलाते हैं अभी …

स्त्री बारिश देख रही है

सामने वाली खिड़की पर चाय का कप लिए एक स्त्री बारिश देख रही है उसका नाम शगुफ़्ता ख़ान है बूँदों को घास-मिटटी पर पड़ते देख वैसे ही हलचल से …