Category: नीलाभ

गुणीजनों के विनोद का वर्गमूल

विष्णु खरे के लिए काव्य-कला, रस, छन्द, अलंकार और बिम्बों के साथ-साथ इतिहास और पुराण की गहरी परख थी उन्हें और वे जानते थे कि 1917 के रूस और …

कविनामा-2

इमली की तरह है मेरा दूसरा संगाती एक विराट झंखाड़ मानो झाड़ियों की दैत्याकार प्रजाति का वंशज चुहल-भरी चुटकी काटने और सनसनी पैदा करने वाले फल वैसी ही प्रकृति …

दुःख

काले-काले बाग़ों में कोयल है बोलती आज ही तो चिट्ठी आई बाँके ढोल की खोलती है चिट्ठी गोरी छज्जे पे डोलती हाय घना दुःख है चिट्ठी मुँह से क्यों …