Category: नीरजा हेमेन्द्र

स्नेह-डोर

बदलों के पार बसाने संसार, तुम मुझे क्यों बुलाते हो? तारों के मंडप में किरणें के तार, स्वागत में मेरे तुम क्यों सजाते हो? किरणों के डेरे में प्यार …

खामोश पल की चाह

मंजिल जब एक हो तो अजनबी बन कर कैसे चलें? उमस भरी दोपहरी-सी बेचैन जिन्दगी कैसे ढ़ले? कभी गम दिया कभी दी खुशी, कभी मुक्ति के साथ दी बेबसी सीने  …

बुलबुला

जिज्ञासु मानव सृष्टि के रहस्य सुलझाता रहा सृष्टि से रहस्य की पर्ते निकलती रहीं मानव, मानव जाति की उत्पत्ति के रहस्य खोजता रहा इतिहास और लम्बा होता रहा मानव-मानव …

नयन-तुम्हारे

तुम्हे  जो  देखा,  मन कही खो गया। भीग गया सारा समां,   मौसम दीवाना हो गया। होठ थे खामोश तुम्हारे, आँखों में बिखरे अफसाने। मूक निमंत्रण दे गये, वाचाल-से …