Category: मिर्ज़ा ग़ालिब

मिर्ज़ा ग़ालिब के मशहूर शेर

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक… इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना दर्द का हद से गुज़रना …

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले डरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन पर वो खून …