Category: कविता गौड़

सोच

सोच टूटे दरख़्त टूटे घर टूटे रिश्ते बड़े होटल बड़े काम्पलेकस बड़े देश बड़ी लालसा बड़ी रिश्वत बड़ी शत्रुता बड़ा काण्ड बडा स्वार्थ बड़ा आतंकवाद छोटी सोच छोटा दाम …

तलाश

गुलाब बनने को तैयार हैं सब बरगद कौन बनना चाहता है गुंबद बनने को तैयार हैं सब नींव की ईंट कौन बनना चाहता है वाह-वाही पाना चाहते हैं सब …

वृक्ष और मनुष्य

मनुष्य कभी वृक्ष नहीं बन सकता क्योंकि उसमें वो त्याग और परोपकार का भाव नहीं होता मनुष्य कभी वृक्ष नहीं बन सकता क्योंकि उसमें दूसरों द्वारा पहुँचाए कष्ट सहने …