Category: ज़ौक़

यह अक़ामत हमें पैग़ामे-सफ़र देती है

यह अक़ामत हमें पैग़ामे-सफ़र देती है ज़िंदगी मौत के आने की ख़बर देती है ज़ाल दुनिया है अजब तरह की अल्लामा-ए-दहर मर्दे-दींदार को भी दहर यह कर देती है …

तेरे कूचे को वोह बीमारे-ग़म दारुश्शफ़ा समझे

तेरे कूचे को वोह बीमारे-ग़म दारुलशफा समझे अज़ल को जो तबीब  और मर्ग  को अपनी दवा समझे सितम को हम करम समझे जफ़ा को हम वफ़ा समझे और इस पर भी न समझे …

तेरा बीमार न सँभला जो सँभाला लेकर

तेरा बीमार न सँभला जो सँभाला लेकर चुपके ही बैठे रहे दम को मसीहा लेकर शर्ते-हिम्मत नहीं मुज़रिम हो गिरफ्तारे-अज़ाब तूने क्या छोड़ा अगर छोड़ेगा बदला लेकर मुझसा मुश्ताक़े-जमाल एक न …

जान के जी में सदा जीने का ही अरमाँ रहा

जान के जी में सदा जीने का ही अरमाँ रहा दिल को भी देखा किये यह भी परेशाँ ही रहा कब लिबासे-दुनयवी में छूपते हैं रौशन-ज़मीर ख़ानाए-फ़ानूस में भी शोला उरियाँ …

क्या ग़रज़ लाख ख़ुदाई में हों दौलत वाले

क्या ग़रज़ लाख ख़ुदाई में हों दौलत वाले उनका बन्दा हूँ जो बन्दे हैं मुहब्बत वाले गए जन्नत में अगर सोज़े महब्बत वाले तो ये जानो रहे दोज़ख़ ही …

उसे हमने बहुत ढूँढा न पाया

उसे हमने बहुत ढूँढा न पाया अगर पाया तो खोज अपना न पाया जिस इन्साँ को सगे-दुनिया न पाया फ़रिश्ता उसका हमपाया न पाया मुक़द्दर से ही गर सूदो-ज़ियाँ है तो हमने याँ …

इस तपिश का है मज़ा दिल ही को हासिल होता

इस तपिश का है मज़ा दिल ही को हासिल होता काश, मैं इश्क़ में सर-ता-ब-क़दम दिल होता करता बीमारे-मुहब्बत का मसीहा जो इलाज इतना दिक़ होता कि जीना उसे मुश्किल होता आप …

आज उनसे मुद्दई कुछ मुद्दा कहने को है

आज उनसे मुद्दई कुछ मुद्दआ कहने को है यह नहीं मालूम क्या कहवेंगे क्या कहने को है देखे आईने बहुत, बिन ख़ाक़ हैं नासाफ़ सब हैं कहाँ अहले-सफ़ा, अहले-सफ़ा …

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जायेंगे

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जायेंगे मर गये पर न लगा जी तो किधर जायेंगे सामने-चश्मे-गुहरबार के, कह दो, दरिया चढ़ के अगर आये तो नज़रों …