Category: जमील मज़हरी

तोल अपने को तोल

देख के कर्रोफ़र दौलत की तेरा जी ललचाय सूँघ के मुश्की ज़ुल्फ़ों की बू नींद-सी तुझ को आए जैसे बे-लंगर की किश्ती लहरों में बोलाय मन की मौज में …

औरत

है तेरे जल्वा-ए-रंगी से उजाली दुनिया तुझसे आबाद है शाइर की ख़याली दुनिया नग़्म:-ए-रूहे अमल, बू-ए-गुलिस्तान-ए-हयात गर्मि-ए-बज़्मे जहाँ शमः-ए-शबिस्तान-ए-हयात तू है मासूम, तिरी सारी अदाएँ मासूम इन्तहा ये है कि होती …