Category: जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’

शहीदों की चिताओं पर

उरूजे कामयाबी पर कभी हिन्दोस्ताँ होगा । रिहा सैयाद के हाथों से अपना आशियाँ होगा ।। चखाएँगे मज़ा बर्बादिए गुलशन का गुलचीं को । बहार आ जाएगी उस दम …

उच्छवासों से

ऐ उर के जलते उच्छ्वासों जग को ज्वलदांगार बना दो, क्लान्त स्वरों को, शान्त स्वरों को, सबको हाहाकार बना दो, सप्तलोक क्या भुवन चतुर्दश को, फिरकी सा घूर्णित कर …