Category: इन्दु श्रीवास्तव

उधारी व्याज के चलते बखत की मार के चलते

उधारी व्याज के चलते बखत की मार के चलते सरे बाज़ार हम रुसवा हुए बाज़ार के चलते तेरे रहमोकरम पे जो अंधेरे तलघरों में थे यक़ीनन रोशनी में आ …

कहो या न कहो दिल में तुम्हारे लाख बातें हैं

कहो या न कहो दिल में तुम्हारे लाख बातें हैं कि इस दुनिया में तुमको हम से बेहतर कौन समझेगा हमीं इक हैं तुम्हारे साथ जो हर हाल में …

हमारी आग को पानी करोगे

हमारी आग को पानी करोगे दिली रिश्तों को बेमानी करोगे हमें ऐसी न थी उम्मीद तुमसे कि तुम इतनी भी नादानी करोगे यक़ीनन आँधियों से मिल गए हो दिये …

आए हैं जिस मक़ाम से उसका पता न पूछ

आए हैं जिस मक़ाम से उसका पता न पूछ रुदादे-सफ़र पूछ मगर रास्ता न पूछ गर हो सके तो देख ये पाँवों के आबले सहरा कहाँ था और कहाँ ज़लज़ला …