Category: इन्दु जैन

जानना ज़रूरी है

जब वक्त कम रह जाए तो जानना ज़रूरी है कि क्या ज़रूरी है सिर्फ़ चाहिए के बदले चाहना पहचानना कि कहां हैं हाथ में हाथ दिए दोनों मुखामुख मुस्करा …

हस्पताल

सूनी इमारत कहीं कोई नज़र नहीं आता आती हैं दो आवाज़ें दर्द को बखानती एक सहलाती दूसरी कभी-कभी उड़ने वाले कबूतर फ़र्श पर घिसे जमें बींट के निशान आदमी …

बाढ़ में बाँस

बाढ़ डूबी झोंपड़ियों के आसमान पर हेलिकॉटर उड़ान भरता है दया के क़तरे टपकाता हुआ बाढ़ बढ़ाता हुआ बाँस लेकर जूझ रही है झोपड़ी फिर खड़ी होने को टीन …

मौसम

ये कैसा मौसम है कि छाँह देने वाले पेड़ की शहतीरों से कमरे में ख़ून टपकने लगा कि कविता पुरस्कृत होते ही मेरी अपनी नज़रों में ख़ुद पर प्रश्नचिन्ह …