Category: इब्ने इंशा

हम घूम चुके बस्ती-वन में

हम घूम चुके बस्ती-वन में इक आस का फाँस लिए मन में कोई साजन हो, कोई प्यारा हो कोई दीपक हो, कोई तारा हो जब जीवन-रात अंधेरी हो इक …

हम उनसे अगर मिल बैठते हैं

हम उनसे अगर मिल बैठते हैं क्या दोष हमारा होता है कुछ अपनी जसारत होती है कुछ उनका इशारा होता है कटने लगीं रातें आँखों में, देखा नहीं पलकों …

सावन-भादों साठ ही दिन हैं

सावन-भादों साठ ही दिन हैं फिर वो रुत की बात कहाँ अपने अश्क मुसलसल बरसें अपनी-सी बरसात कहाँ चाँद ने क्या-क्या मंज़िल कर ली निकला, चमका, डूब गया हम …

साए से

क्यों मेरे साथ-साथ आता है ? मेरी मंज़िल है बेनिशाँ नादाँ साथ मेरा-तेरा कहाँ नादाँ थक गए पाँव पड़ गए छाले मंज़िलें टिमटिमा रही हैं – दूर बस्तियाँ और जा …

लोग पूछेंगे

लोग पूछेंगे क्यों उदास हो तुम और जो दिल में आए सो कहियो “यूँ ही माहौल की गिरानी है दिन ख़िज़ाँ के ज़रा उदास-से हैं कितने बोझिल हैं शाम …

रेख़्ता

(एक) लोग हिलाले-शाम से बढ़कर पल में माहे-तमाम हुए हम हर बुर्ज में घटते-घटते सुबह तलक गुमनाम हुए उन लोगों की बात करो जो इश्क में खुश-अंजाम हुए नज्द …

रात के ख्वाब सुनाएं किस को रात के ख्वाब सुहाने थे

रात के ख्वाब सुनाए किस को रात के ख्वाब सुहाने थे| धुंधले धुंधले चेहरे थे पर सब जाने पहचाने थे| जिद्दी वहशी अल्हड़ चंचल मीठे लोग रसीले लोग, होंठ …

ये बातें झूठी बातें हैं

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलाई हैं तुम इंशा जी का नाम न लो, क्या इंशा जी सौदाई हैं? हैं लाखों रोग ज़माने में, क्यों इश्क़ है …

यह बच्चा किसका बच्चा है

1. यह बच्चा कैसा बच्चा है यह बच्चा काला-काला-सा यह काला-सा, मटियाला-सा यह बच्चा भूखा-भूखा-सा यह बच्चा सूखा-सूखा-सा यह बच्चा किसका बच्चा है यह बच्चा कैसा बच्चा है जो …

फ़र्ज़ करो

फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों अफ़साने हों फ़र्ज़ करो ये जी की बिपता, जी से जोड़ सुनाई …

फ़क़ीर बन कर तुम उनके दर पर हज़ार धुनि रमा के बैठो

फ़क़ीर बन कर तुम उनके दर पर हज़ार धुनि रमा के बैठो जबीं के लिक्खे को क्या करोगे जबीं का लिक्खा मिटा के देखो ऐ उनकी महफ़िल में आने …

देख हमारे माथे पर

देख हमारे माथे पर ये दश्त-ए-तलब की धूल मियां हम से है तेरा दर्द का नाता, देख हमें मत भूल मियां अहल-ए-वफ़ा से बात न करना होगा तेरा उसूल …

जोग बिजोग की बातें झूठी सब जी का बहलाना हो

जोग बिजोग की बातें झूठी सब जी का बहलाना हो| फिर भी हम से जाते जाते एक ग़ज़ल सुन जाना हो| सारी दुनिया अक्ल की बैरी कौन यहां पर …

ख़याल कीजिये क्या काम आज मैं ने किया

ख़याल कीजिये क्या काम आज मैं ने किया| जब उन्ने दी मुझे गाली सलाम मैं ने किया| कहा ये सब्र ने दिल से के लो ख़ुदाहाफ़ीज़, के हक़-ए-बंदगी अपना …

कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा

कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा । कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा । हम भी वहीं मौजूद थे, हम …

कमर बांधे हुए चलने पे यां सब यार बैठे हैं

कमर बांधे हुए चलने पे यां सब यार बैठे हैं बोह्त आगे गए, बाक़ी जो हैं तैयार बैठे हैं न छेड़ ए निकहत-ए-बाद-ए-बहारी, राह लग अपनी तुझे अटखेलियां सूझी …

और तो कोई बस न चलेगा हिज्र के दर्द के मारों का

और तो कोई बस न चलेगा हिज्र के दर्द के मारों का| सुबह का होना दूभर कर दें रस्ता रोक सितारों का| झूठे सिक्कों में भी उठा देते हैं …

ऐ मुँह मोड़ के जाने वाली

ऐ मुँह मोड़ के जाने वाली, जाते में मुसकाती जा मन नगरी की उजड़ी गलियाँ सूने धाम बसाती जा दीवानों का रूप न धारें या धारें बतलाती जा मारें …

इंशाजी उठो अब कूच करो

इंशाजी उठो अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या वहशी को सुकूं से क्या मतलब, जोगी का नगर में ठिकाना क्या इस दिल के दरीदा दामन …

इंतज़ार की रात

उमड़ते आते हैं शाम के साये दम-ब-दम बढ़ रही है तारीकी एक दुनिया उदास है लेकिन कुछ से कुछ सोचकर दिले-वहशी मुस्कराने लगा है- जाने क्यों ? वो चला कारवाँ …